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शेयरों में ब्लॉक डील के नियम बदल सकते हैं, जानिए इस बारे में क्या है SEBI की तैयारी

ब्लॉक डील के मौजूदा नियम 2017 में बनाए गए थे। मार्केट साइज सहित दूसरे बदलावों को देखते हुए इन नियमों में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। सेबी ने मौजूदा नियमों पर विचार के लिए एक वर्किंग ग्रुप बनाया था। इस ग्रुप ने अपने सुझाव दिए हैं

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Aug 11, 2025 पर 1:06 PM
शेयरों में ब्लॉक डील के नियम बदल सकते हैं, जानिए इस बारे में क्या है SEBI की तैयारी
अभी जो नियम लागू है, उसमें ब्लॉक डील के लिए 1 फीसदी की रेंज तय है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि यह रेंज बहुत कम और अव्यावहारिक है।

ब्लॉक डील के नियमों में बदलाव हो सकता है। सेबी के एक वर्किंग ग्रुप ने ब्लॉक डील से जुड़े मौजूदा नियम और शर्तों पर विचार किया है। इसके बाद ग्रुप ने कुछ सुझाव दिए हैं। इसमें बड़े ट्रेड के लिए रेफरेंस प्राइस की बड़ी रेंज का सुझाव शामिल है। समूह ने सुबह के ट्रेड विंडो और दोपहर बाद के ट्रेड विंडो के लिए अलग-अलग प्राइस रेंज का भी सुझाव दिया है। इस मामले से जुड़े लोगों ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी। ब्लॉक डील एक्सचेंज पर होने वाला ऐसा ट्रेड है, जिसकी कीमत दोनों पक्ष आपसी बातचीत के बाद तय करते हैं।

वर्किंग ग्रुप प्राइस रेंज बढ़ाने के पक्ष में

सूत्रों ने बताया कि SEBI के वर्किंग ग्रुप के ज्यादातर सदस्यों का मानना है कि ब्लॉक डील (Block Deal) के लिए मॉर्निंग ट्रे़ड विंडो के लिए ऊपर या नीचे दोनों ही दिशा में 5 फीसदी की प्राइस रेंज होनी चाहिए। दोपहर बाद के विंडों के लिए 3 फीसदी की रेंज होनी चाहिए। हालांकि, BSE ने मॉर्निंग ट्रेड विंडो और ऑफ्टरनून ट्रेड विंडों के लिए दोनों ही दिशा में कॉमन 2 फीसदी प्राइस रेज का सुझाव दिया है। सूत्रों ने बताया कि बीएसई का मानना है कि 2 फीसदी से ज्यादा की प्राइस रेंज का असर ट्रेडिंग सेशन के दौरान लिक्विडिटी पर पड़ेगा।

अभी सिर्फ एक फीसदी की रेंज तय है

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