भारतीय बाजार में आगे कई सालों तक कायम रहेगी तेजी, मिड और स्मॉलकैप शेयरों में कमाई के मौके: DSP Mutual Fund

भारत में स्माल और मिड कैप सेक्टर को इकोनॉमिक ग्रोथ और तेजी का भी फायदा मिलेगा। घरेलू इंडीकेटर्स में मजबूती के साथ ही भारत की रियल इकोऩॉमी मे तेजी कायम रहने की उम्मीद है। हालांकि ग्लोबल स्लोडाउन का बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जाने वाला डर बाजार के लिए एक जोखिम हो सकता है

अपडेटेड Dec 20, 2022 पर 5:29 PM
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डीएसपी की रिसर्च टीम का ये भी कहना है कि चीन के बाजार के फिर से खुलने से कमोडिटी की कीमतों में किसी बड़ी बढ़त की उम्मीद नहीं है

डीएसपी म्यूचुअल फंड (DSP Mutual Fund) ने हाल ही में जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत इस समय एक मल्टी ईयर बुल मार्केट के दौर में है। हालांकि बीच-बीच में इसमें पुलबैक और करेक्शन आते रहेंगे। डीएसपी म्यूचुअल फंड की मार्केट स्ट्रैटजी और इकोनॉमी टीम के मुताबिक आगे हमें मिड और स्मॉलकैप शेयरों में निवेश के ज्यादा बेहतर मौके देखने को मिलेंगे। इस टीम का मानना है कि लार्ज कैप में काफी तेजी आ चुकी है जिससे चलते इनके वैल्यूएशन महंगे नजर आ रहे हैं। आगे हमें लॉर्ज कैप में कंसोलीडेशन देखने को मिल सकता है।

मल्टी ईयर बुल मार्केट के दौर में भारत

DSP Mutual Fund की प्रोडक्ट मैनेजर और इकोनॉमिस्ट अंकिता पाठक का कहना है कि हमे मजबूत अर्निंग ग्रोथ, जोरदार फंडामेंटल्स और दूसरे उभरे बाजारों की तुलना में बेहतर जीडीपी को देखते हुए भारतीय बाजार आगे जोरदार मजबूती आने की संभावना दिख रहा है। बता दें कि अंकिता पाठक डीएसपी म्यूचुअल फंड की "The Navigator"शीर्षक वाली इस रिपोर्ट की सह-लेखिका भी हैं। उन्होंने आगे कहा कि अर्निंग के नजरिए भारतीयों बाजारों को दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में साफ बढ़त हासिल है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमारा मानना है कि भारत में अगले कई साल तक तेजी देखने को मिलेगी। हालांकि बीच-बीच में इसमें कुछ शॉर्ट टर्म टाइम करेक्शन देखने को मिल सकता है।


चीन के बाजार के फिर से खुलने से कमोडिटी कीमतों में बड़ी बढ़त की उम्मीद नहीं

डीएसपी म्यूचुअल फंड का मानना है कि आगे इंडिया इंक के मार्जिन में ग्रोथ की अच्छी संभावना है। जिसके चलते अर्निंग ग्रोथ भी अच्छी रहेगी। डीएसपी की रिसर्च टीम का ये भी कहना है कि चीन के बाजार के फिर से खुलने से कमोडिटी की कीमतों में किसी बड़ी बढ़त की उम्मीद नहीं है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के बाजारों से धीरे-धीरे खुलने से न सिर्फ कमोडिटी की मांग बढ़ेगी। बल्कि चीन से आने वाली सप्लाई में भी सुधार होगा। ऐसे में कमोडिटी की कीमतों पर इसका कोई बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

इस रिसर्च टीम का मानाना है कि डॉलर में कमजोरी के साथ ही उभरते बाजारों में हमें तेजी देखने को मिलेगी। आगे मौद्रिक नीतियों में कड़ाई के क्रम में थोड़ी कमी आती नजर आ सकती है। जिसके चलते डॉलर में और कमजोरी आ सकती है। ये उभरते बाजारों के लिए एक अच्छा संकेत होगा। इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अगर उभरते बाजारों में तेजी रहती है तो इसका फायदा भारतीय मार्केट में स्माल और मिडकैप सेगमेंट को मिलेगा।

उभरते बाजारों के अच्छा प्रदर्शन करने से भारतीय बाजारों को तुलनात्मक रूप से ज्यादा फायदा हो सकता है। क्योंकि विदेशी पैसे का प्रवाह भारत के पक्ष में ज्यादा नजर आ रहा है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पिछले साल भारतीय बाजार का औसत रिटर्न उभरते बाजार के औसत रिटर्न की तुलना में ज्यादा रहा है। भारत के फंडामेंटल इस समय काफी मजबूत नजर आ रहे हैं। ऐसे में भारत में भारी मात्रा में विदेशी पैसे आ सकते हैं।

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इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत में स्माल और मिड कैप सेक्टर को इकोनॉमिक ग्रोथ और तेजी का भी फायदा मिलेगा। घरेलू इंडीकेटर्स में मजबूती के साथ ही भारत की रियल इकोऩॉमी मे तेजी कायम रहने की उम्मीद है। हालांकि ग्लोबल स्लोडाउन का बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जाने वाला डर बाजार के लिए एक जोखिम हो सकता है। लेकिन सही शेयरों को चुनाव करके इस जोखिम से बचा जा सकता है।

 

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