कैलेंडर ईयर 2023 में निवेशकों के लिए उन सेक्टरों पर फोकस करना ज्यादा बेहतर रहेगा, जो घरेलू ग्रोथ पर आधारित हैं। एक्सपोर्ट आधारित कंपनियों की तुलना में घरेलू ग्रोथ और इकोनॉमी पर आधारित कंपनियों पर फोकस करना ज्यादा फायदेमंद होगा। इसके अलावा अगले साल हमें ऐसी कंपनियां भी बेहतर प्रदर्शन करती नजर आ सकती हैं जिनकी ब्रैंड पहचान बहुत मजबूत है। लेकिन कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी और दूसरी दिक्कतों के कारण उनकी मार्जिन पर दबाव देखने को मिला है। साल 2023 में कमोडिटी और दूसरे कच्चे माल की कीमतों में नरमी के कारण इन कंपनियों में निचले स्तर से जोरदार सुधार आता दिख सकता है। ऐसे में इन कंपनियों पर निवेशकों को नजर रखना चाहिए। ये बातें एथेना इन्वेस्टमेंट्स के विनीत बागरी ने मनीकंट्रोल से हुई बातचीत में कही हैं।
उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि पिछले कुछ महीनों से हमें कैलेंडर ईयर 2023 के ग्रोथ अनुमान में लगातार कटौती देखने को मिली है। लेकिन अगले 12 महीने में ग्लोबल ग्रोथ एक ऐसा बड़ा फैक्टर होगा जो इक्विटी बाजारों की दिशा तय करेगा। बतातें चलें कि विनीत एथना इन्वेस्टमेंट में चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और CIO हैं। इनको फाइनेंशियल मार्केट का 23 साल का अनुभव है।
2023 में बाजार हमारे धैर्य की ले सकता है परीक्षा
इस बातचीत में उन्होंने कहा कि वर्तमान लेवल पर हमारे बाजार का वैल्यूएशन अच्छा नजर आ रहा है। ऐसे में अगले 12 महीने में बाजार में आने वाली कोई तेजी कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ के मुताबिक ही होगी। हमें लगता है कि 2023 में बाजार हमारे धैर्य की परीक्षा ले सकता है। ऐसे में निवेश की सबसे बेहतर रणनीति सिस्टेमेटिक और रेगुलर निवेश के जरिए इक्विटी में खरीदारी करने की होगी। एक बार वर्तमान टाइम करेक्शन का दौर पूरा हो जाने के बाद बाजार में शानदार रिकवरी आएगी। इस स्थिति में आपको अभी किए गए निवेश का जबरदस्त फायदा होगा।
ऑटो सेक्टर भी अच्छा, बैंकिंग में भी दिखेगी तेजी
घरेलू अर्थव्यवस्था और इकोनॉमी पर आधारित शेयरों के अलावा विनीत बागरी को ऑटो सेक्टर भी अच्छा नजर आ रहा है। उनका कहना है कि मेटल की कीमतों में गिरावट और सेमीकंडक्टर की आपूर्ति से जुड़ी समस्या के समाधान के साथ ही ऑटो सेक्टर में बेहतर मुनाफे और मार्जिन की संभावना है। बैंकिंग सेक्टर भी विनीत बागरी को पसंद आ रहा है। उनका कहना है कि कई सालों बाद हमें बैंकिंग सेक्टर में एक बार फिर से 15 फीसदी से ज्यादा की क्रेडिट ग्रोथ देखने को मिल रही है। इसके साथ ही NPA में कमी आने के कारण बैंकों की प्रॉविजनिंग भी कम हुई है। इससे आगे बैंकिंग सेक्टर के मुनाफे और मार्जिन में बढ़त की संभावना है।
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