Crude Oil Price: मार्च में 59% बढ़ा ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव, बना नया रिकॉर्ड; शेयर बाजार की बढ़ी टेंशन

Crude Oil Price: पश्चिम एशिया में ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव का अब ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स पर साफ दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल के भाव में इस महीने रिकॉर्ड उछाल देखने को मिला है। वहीं एशियाई शेयर बाजार 2022 के बाद की अपनी सबसे बड़ी गिरावट की ओर बढ़ रहे हैं

अपडेटेड Mar 31, 2026 पर 12:57 PM
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Crude Oil Price: MSCI का एशिया-पैसिफिक इंडेक्स (जापान को छोड़कर) मार्च में 12% से अधिक की गिरावट की ओर बढ़ रहा है

Crude Oil Price: पश्चिम एशिया में ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव का अब ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स पर साफ दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल के भाव में इस महीने रिकॉर्ड उछाल देखने को मिला है। वहीं एशियाई शेयर बाजार 2022 के बाद की अपनी सबसे बड़ी गिरावट की ओर बढ़ रहे हैं। लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों के बीच महंगाई और ग्लोबल आर्थिक सुस्ती की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।

कच्चे तेल में ऐतिहासिक उछाल

ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 2% की तेजी दर्ज की गई और यह 114.98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। पूरे मार्च महीने में इसमें लगभग 59% की उछाल दर्ज होने जा रही है, जो अब तक की सबसे बड़ी मंछली उछाल मानी जा रही है।

वहीं, अमेरिकी क्रूड (WTI) भी 1.8% चढ़कर 104.73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया और इसमें भी करीब 56% की मंथली तेजी देखने को मिली है। यह लगभग छह साल का सबसे बड़ा उछाल है। तेल की कीमतों में यह तेजी सीधे तौर पर ईरान युद्ध और एनर्जी सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं से जुड़ी हुई है।


एशियाई बाजारों में भारी दबाव

तेल की कीमतों में तेजी और अनिश्चितता के माहौल का सबसे ज्यादा असर एशियाई शेयर बाजारों पर पड़ा है। MSCI का एशिया-पैसिफिक इंडेक्स (जापान को छोड़कर) 0.55% गिरा और मार्च में 12% से अधिक की गिरावट की ओर बढ़ रहा है, जो सितंबर 2022 के बाद सबसे बड़ी गिरावट होगी।

जापान का निक्केई इंडेक्स 0.93% गिरा और इस महीने करीब 12.6% नीचे जाने की कगार पर है। वहीं, साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 17% से अधिक गिरने की ओर बढ़ रहा है, जो 2008 के बाद सबसे बड़ी गिरावट हो सकती है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, अधिकतर एशियाई देश मिडिल ईस्ट से एनर्जी आयात पर काफी निर्भर हैं, इसलिए तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर इन बाजारों पर पड़ रहा है।

निवेशकों में बढ़ी घबराहट

मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि निवेशक अब केवल खबरों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय जोखिम कम करने की रणनीति अपना रहे हैं। मिजुहो बैंक के मैक्रो रिसर्च हेड विष्णु वराथन के मुताबिक, बाजार अब “फियर मोड” में आ चुका है, जहां निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बना रहे हैं।

हालांकि, कुछ राहत तब देखने को मिली जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान समाप्त करने के लिए तैयार हो सकते हैं, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला न हो। इस खबर के बाद अमेरिकी और यूरोपीय फ्यूचर्स में हल्की तेजी देखने को मिली।

महंगाई बनी सबसे बड़ी चिंता

एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा समय में ग्लोबल बाजारों के लिए सबसे बड़ा जोखिम महंगाई है। एनर्जी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका असर उपभोक्ता की कीमतों पर पड़ेगा। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इसका असर ग्लोबल जीडीपी की ग्रोथ रेट पर भी पड़ सकता है।

बॉन्ड बाजार में गिरावट, डॉलर मजबूत

तेल की कीमतों में उछाल और महंगाई की चिंता के चलते ग्लोबल बॉन्ड बाजारों में भी दबाव देखा गया है। निवेशक अब केंद्रीय बैंकों से मॉनिटरी पॉलिसी में सख्ती की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे बॉन्ड यील्ड में तेजी आई है और कीमतों में गिरावट हुई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने भी संकेत दिया है कि केंद्रीय बैंक जल्दबाजी में ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा और पहले आर्थिक हालात का आकलन करेगा।

इस माहौल में डॉलर ने सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) के रूप में मजबूती दिखाई है और यह पिछले आठ महीनों की सबसे बड़ी मंथली बढ़त की ओर बढ़ रहा है।

सोने में हल्की तेजी

कीमती धातुओं में सोने की कीमत में 0.6% की बढ़त देखी गई और यह 4,538 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। हालांकि, महंगाई और ब्याज दरों की अनिश्चितता के चलते इसमें उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

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