एनालिस्ट्स ने कहा कि सेबी (Securities and Exchange Board of India (Sebi) की मंजूरी के बाद भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (Multi Commodity Exchange (MCX) को विशेष रूप से और पूरे बाजार को कमोडिटी डेरिवेटिव्स में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (foreign portfolio investors (FPIs) द्वारा किये जाने वाले ट्रेड्स को हरी झंडी मिलने का फायदा मिलेगा।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Sebi) ने बुधवार को एफपीआई को सभी नॉन-एग्रीकल्चरल कमोडिटीज डेरिवेटिव्स और चुनिंदा नॉन-एग्रीकल्चरल बेंचमार्क इंडेक्सेस में ट्रेडिंग करने की मंजूरी दे दी। शुरुआत में एफपीआई को केवल कैश सेटलमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स (cash-settled contracts) के लिए ही अनुमति दी जाएगी।
इसके पहले केवल जिन विदेशी निवेशकों के पास भौतिक रूप से इंडियन कमोडिटीज होती थी, केवल उन्हें अपने प्राइस रिस्क को हेज करने के लिए कमोडिटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग करने की अनुमति थी। अब इस सिस्टम को खत्म कर दिया गया है।
HDFC securities के तपन पटेल ने कहा “सेबी की घोषणा ग्लोबल लेवल पर भारतीय कमोडिटी बाजार को मजबूत और विकसित करने की बड़ी यात्रा की दिशा में एक छोटा कदम है। इस मार्केट में भागीदारी बढ़ने से कमोडिटी बाजार में निवेश बढ़ेगा। इसके साथ ही बेहतर कीमत मिलने के चलते वॉल्यूम भी बढ़ेगा।
“सेबी के फैसले से ग्लोबल निवेशकों से बड़ी मात्रा में आर्बिट्राज और हेजिंग ट्रेड्स बाजार में होते हुए दिखाई देंगे। इस कदम से बाजार में घटते हुए वॉल्यूम और कुल मार्केट सेंटिमेंट्स को सहारा मिलेगा।
विदेशी निवेशक अब मेटल, एनर्जी और बुलियन कमोडिटीज में स्वतंत्र रूप से ट्रेड कर सकेंगे। एमसीएक्स इस सेगमेंट में सबसे आगे होने के नाते इसे बड़ा फायदा होगा। यानी कि इसमें वॉल्यूम बढ़ा तो फर्म की आय भी बढ़ेगी।
Mehta Equities के प्रशांत तापसे ने कहा "इसका मतलब एमसीएक्स का कारोबार और आय बढ़ेगी। इसकी वजह ये है कि एफपीआई के पास काफी पैसा है। वे चुनिंदा कमोडिटीज में बड़े वॉल्यूम में ट्रेड कर सकते हैं।"
हालांकि इससे बाजार मजबूत होगा और कुछ कम कारोबार वाले कॉन्ट्रैक्ट में अब अधिक निवेश आते हुए दिख सकता है।
SMC Global की वंदना भारती ने कहा "इससे कम निवेश वाले कॉन्ट्रैक्ट को सहारा मिलेगा। विदेशी निवेशक भारतीय कमोडिटी एक्सचेंजों के नए टूल्स का आनंद लेंगे। इसका मतलब ये है कि वे कमोडिटीज में ऑप्शन और फ्यूचर में इंडेक्स ट्रेडिंग कर सकेंगे।"
वंदना ने आगे कहा कि सेबी द्वारा पोजीशन लिमिट्स की शर्त लगाने के कारण इसमें पैसों की बाढ़ आने की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। बहरहाल यह पैसो की कमी का सामना कर रहे कमोडिटी बाजार को मजबूत जरूर बनायेगा।