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MC Exclusive: एफएंडओ के सेबी के नए नियमों से बचने के लिए ब्रोकरेज फर्में क्लाइंट्स को डब्बा-ट्रेडिंग ऐप ऑफर कर रहीं

ब्रोकरेज फर्मों को आशंका थी कि सेबी के नए नियमों से उनके रेवेन्यू में बड़ी गिरावट आएगी। अपनी कमाई को घटने से बचाने के लिए ब्रोकरेज फर्मों ने अपने क्लाइंट्स को डब्बा-ट्रेडिंग ऐप उपलब्ध कराए हैं। इसके लिए ऐसी एनटीटी का इस्तेमाल होता है, जो दूसरे देशों में रजिस्टर्ड होती हैं। इससे वे सेबी की पकड़ में नहीं आती हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 13, 2024 पर 6:06 PM
MC Exclusive: एफएंडओ के सेबी के नए नियमों से बचने के लिए ब्रोकरेज फर्में क्लाइंट्स को डब्बा-ट्रेडिंग ऐप ऑफर कर रहीं
इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बहुत कम ब्रोकरेज फर्में इस तरह की रिस्की गतिविधियों में शामिल होती है।

ब्रोकरेज फर्मों ने इंडेक्स-डेरिवेटिव्स के सेबी के नए नियमों से बचने के तरीके ढूंढ लिए हैं। कम से कम दो ब्रोकरेज फर्मों को इन नियमों से बचने के नए तरीके इस्तेमाल करते पाया गया है। खासकर उस नियम का तोड़ ब्रोकरेज फर्मों ने निकाले हैं, जिसके चलते वीकली एक्सपायरी में कमी आई है। सूत्रों ने यह बताया है। मार्केट रेगुलेटर ने 1 अक्टूबर को इंडेक्स-डेरिवेटिव्स सेगमेंट के लिए नया फ्रेमवर्क जारी किया था। इस फ्रेमवर्क में कई तरह के उपाय शामिल थे, जिनका मकसद वीकली एक्सपायरी के कॉन्ट्रैक्ट्स में कमी लाना, कॉन्ट्रैक्ट साइज को बढ़ाना और जीरो-डेज टू एक्सपायरी (ODTE) वाले कॉन्ट्रैक्ट पर अतिरिक्त मार्जिन लगाना था।

सेबी के नए नियम 20 नवंबर से लागू

SEBI का नया फ्रेमवर्क 20 नवंबर से लागू हो चुका है। इसका असर दिसंबर की शुरुआत से दिखा है। ब्रोकरेज फर्मों को आशंका थी कि सेबी के नए नियमों से उनके रेवेन्यू में बड़ी गिरावट आएगी। अपनी कमाई को घटने से बचाने के लिए ब्रोकरेज फर्मों ने अपने क्लाइंट्स को डब्बा-ट्रेडिंग ऐप उपलब्ध कराए हैं। सूत्रों ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी है। डब्बा-ट्रेडिंग अवैध है। इसमें ट्रेड के लिए रेगुलेटर मार्केट चैनल का इस्तेमाल नहीं होता है। इसमें ट्रेडर के पास सिक्योरिटी नहीं होती है, इसके बावजूद वह सिक्योरिटीज की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर दांव लगाता है।

दो सर्वर का होता है इस्तेमाल

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