क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के पहले ही दिन कई ब्रोकर्स ने खुदरा निवेशकों को दोपहर 3 बजे तक अपनी पोजिशन स्क्वेयर ऑफ यानी बंद करने की सलाह दी। सोमवार को नए नियम लागू होने के बाद अहम इंडेक्सेज और कुछ स्टॉक्स में कैश और फ्यूचर्स के भाव के बीच भारी-भरकम गैप देखने को मिला, जिससे मार्केट में कंफ्यूजन की स्थिति बन गई। ब्रोकरेजेज ने अपने क्लाइंट्स को जब तक नए मैकेनिज्म में मार्केट ढल नहीं जाता है, अपनी पोजिशन 3:00 PM और 3:05 PM के बीच बंद करने की सलाह दी है। एक ब्रोकरेज फर्म के टॉप ऑफिशियल ने कहा कि रिटेल क्लाइंट्स को 3 बजे तक अपनी सभी पोजिशन स्क्वेयर ऑफ करने की सलाह दी गई है। उनका कहना है कि फिलहाल मार्केट में काफी अनिश्चितता है और वह नहीं चाहते कि उनके क्लाइंट्स को किसी तरह का नुकसान उठाना पड़े।
ब्रोकरेज की यह सलाह ऐसे समय में आई है, जब एक कारोबारी दिन पहले मार्केट में असामान्य स्थिति देखने को मिली। दोपहर 3:15 बजे के बाद कैश मार्केट में भाव फ्यूचर्स मार्केट से अधिक यानी प्रीमियम पर पहुंच गए। आम दिनों में फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट आमतौर पर स्पॉट प्राइस से अधिक प्रीमियम पर ट्रेड करते हैं, क्योंकि उनमें कॉस्ट ऑफ कैरी शामिल होती है। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह फर्क सिर्फ निफ्टी जैसे अहम इंडेक्सेज में ही नहीं बल्कि इंडिविजुअल स्टॉक्स में भी दिखा। इसकी वजह ये है कि कैश मार्केट में 3 अगस्त को 3:15 बजे के बाद क्लोजिंग ऑक्शन के जरिए कीमत तय हो रही थी, जबकि डेरिवेटिव्स मार्केट में सामान्य कारोबार 3:40 PM तक जारी रहा।
बीसीबी ब्रोकरेज के एमडी Uttam Bagri का कहना है कि दिक्कत क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की व्यवस्था में नहीं है, बल्कि इसमें पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करने की है। उनका मानना है कि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संस्थागत निवेशक, आर्बिट्रेज ट्रेडर, लिक्विडिटी प्रोवाइडर इत्यादि क्लोजिंग ऑक्शन में सक्रिय रूप से ऑर्डर डालते हैं या नहीं।
3 अगस्त को देर रात जारी एक प्रेस रिलीज में एनएसई ने कहा कि CAS सेशन के दौरान एक्सचेंज पर इंडेक्स ग्राफ को सही ढंग से समझने की ज़रूरत है, क्योंकि 3:30 बजे इंडेक्स में कोई अचानक बदलाव नहीं होता है, बल्कि ऑर्डर जुटाने, रद्द करने और मैच करने की एक प्रक्रिया होती है। साथ ही 3:15 बजे से 3:30 बजे के बीच ऑर्डर्स की लगातार मैचिंग नहीं होती है, जिससे इंडेक्स वैल्यू स्थिर रहती है क्योंकि यह ट्रेडेड वैल्यू पर आधारित होती है। हालांकि एक्सचेंज की वेबसाइट पर एक इंडिकेटिव वैल्यू दिखती है, जिसे 3:15 बजे से 3:30 बजे के बीच लगातार कैलकुलेट की गई इक्विलिब्रियम कीमतों से निकाला जाता है।
एनएसई का मानना है कि आने वाले समय में क्लोजिंग ऑक्शन में भागीदारी लगातार बढ़ेगी। इसे इसलिए लाया गया है ताकि प्राइस डिस्कवरी अधिक सटीक हो सके और पारदर्शी हो। इसमें खरीदारी और बिक्री के सभी ऑर्डर एक साथ जुटाए जाते हैं और एक भाव तय किया जाता है, जिस पर सभी सौदों का मिलान हो सके। बता दें कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की यह व्यवस्था न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE), लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE), यूरोनेक्स्ट (Euronext), हांगकांग एक्सचेंज (HKEX) और ऑस्ट्रेलियन सिक्योरिटीज एक्सचेंज (ASX) पहले ही अपनी रही है।
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