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NSE September Rejig: Nifty 50 में एंट्री करने के​ लिए BSE तैयार, Wipro हो सकता है बाहर; Nifty 100 में 5 शेयरों में होगा खेल

NSE September Rejig: BSE का AFMC विप्रो के AFMC से 1.5 गुना ज्यादा है। इससे विप्रो Nifty 50 इंडेक्स में सबसे ज्यादा जोखिम वाला शेयर बन गया है। Nifty 100 इंडेक्स में और भी बड़े बदलाव होने की उम्मीद है। इसमें 5 नए स्टॉक शामिल किए जा सकते हैं

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड May 18, 2026 पर 8:55 AM
NSE September Rejig: Nifty 50 में एंट्री करने के​ लिए BSE तैयार, Wipro हो सकता है बाहर; Nifty 100 में 5 शेयरों में होगा खेल
पिछले एक साल में BSE का स्टॉक भारत के सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले फाइनेंशियल स्टॉक्स में से एक रहा है।

BSE Ltd सितंबर 2026 की रीबैलेंसिंग में बेंचमार्क Nifty 50 इंडेक्स में शामिल होने के लिए तैयार है। हो सकता है कि यह IT दिग्गज विप्रो की जगह ले ले। यह बात Quiddity Advisors के एक विश्लेषण में कही गई है। इंडेक्स में बदलाव की शुरुआत के लिए, कम से कम एक ऐसा पात्र स्टॉक होना चाहिए, जिसका एवरेज फ्लोट मार्केट कैप (AFMC) इंडेक्स के सबसे छोटे सदस्य के AFMC से 1.5 गुना ज्यादा हो। Quiddity Advisors के एनालिस्ट जनगन जयकुमार का कहना है कि BSE फिलहाल इस शर्त को पूरा कर रहा है।

BSE का AFMC विप्रो के AFMC से 1.5 गुना ज्यादा है। इससे विप्रो Nifty 50 इंडेक्स में सबसे ज्यादा जोखिम वाला शेयर बन गया है। सिर्फ एक बदलाव होने से Nifty 50 के लिए एकतरफा फ्लो 63.9 करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है। पिछले एक साल में BSE का स्टॉक भारत के सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले फाइनेंशियल स्टॉक्स में से एक रहा है। इसमें 63 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई है। ट्रेडिंग वॉल्यूम में जबरदस्त उछाल, रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, और इसके डेरिवेटिव्स कारोबार में फिर से आई तेजी ने रिकॉर्ड कमाई को बढ़ावा दिया है और तेजी को मजबूती दी है।

Wipro के शेयर की कैसी रही है चाल

इसके उलट Wipro में एक साल में 25 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। इस पर टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़े पैमाने पर कमजोरी और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस से होने वाले बदलावों को लेकर बढ़ती चिंताओं का दबाव रहा है। जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के निराशाजनक नतीजे, अनुमान से कम रेवेन्यू, और अगली तिमाही के लिए -2 प्रतिशत से 0 प्रतिशत की वृद्धि का सतर्क अनुमान, इन सभी चीजों ने कंपनी पर दबाव और बढ़ा दिया है। BFSI सेगमेंट में घटती मांग और गिरते नेट प्रॉफिट की वजह से यह स्टॉक अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर के आस-पास बना हुआ है। अगर विप्रो को निफ्टी इंडेक्स से हटा दिया जाता है, तो पैसिव आउटफ्लो 20.6 करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है।

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