Budget Stocks: बजट आने से पहले बना लें इन स्टॉक्स की लिस्ट, ऐलानों पर सवार होकर ऊपर भागने को हैं तैयार

Budget Stocks: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रिकॉर्ड आठवीं बार बजट पेश करने की तैयारी में हैं। वह 1 फरवरी 2025 को अगले वित्त वर्ष 2026 का बजट पेश करेंगी। मार्केट की नजरें फिलहाल वित्त मंत्री के ऐलान पर है कि वह कौन-कौन सी सौगातें देती हैं। जानिए कि वित्त मंत्री के ऐलान से किन सेक्टर के किन शेयरों को कैसे फायदा मिलेगा?

अपडेटेड Jan 31, 2025 पर 4:49 PM
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Budget Stocks: बजट ऐसे समय में आ रहा है, जब भारत समेत दुनिया भर में काफी अनिश्चिताएं छाई हुई हैं और घरेलू मार्केट से भी विदेशी निवेशक तेजी से पैसे निकाल रहे हैं।

Budget Stocks: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रिकॉर्ड आठवीं बार बजट पेश करने की तैयारी में हैं। वह 1 फरवरी 2025 को अगले वित्त वर्ष 2026 का बजट पेश करेंगी। यह बजट ऐसे समय में आ रहा है, जब भारत समेत दुनिया भर में काफी अनिश्चिताएं छाई हुई हैं और घरेलू मार्केट से भी विदेशी निवेशक तेजी से पैसे निकाल रहे हैं। मार्केट की नजरें फिलहाल वित्त मंत्री के ऐलान पर है कि वह कौन-कौन सी सौगातें देती हैं। जानिए कि वित्त मंत्री के ऐलान से किन सेक्टर के किन शेयरों को कैसे फायदा मिलेगा?

Capex and Infrastructure: L&T, UltraTech Cement

पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव के बाद से ऑर्डर फ्लो की रफ्तार सुस्त है जिससे इंफ्रा सेक्टर की ग्रोथ को झटका लगा है। वित्त वर्ष 2024 में अप्रैल से नवंबर के बीच कैपेक्स 12.3 फीसदी गिर गया। इसके अलावा कैपेक्स और रेवेन्यू का रेश्यो भी वित्त वर्ष 2024 में 28 फीसदी से गिरकर 23 फीसदी पर आ गया जिससे इस तिमाही में तेजी से काम निपटाने की जरूरत का संकेत मिल रहा है। जेफरीज का कहना है कि एलएंडटी के मजबूत इंफ्रा ऑर्डर अच्छी ग्रोथ के संकेत दे रहे हैं। वहीं अल्ट्राटेक की बात करें तो नेशनल इंफ्रा पाइपलाइन (NIP), प्रधानमंत्री गति शक्ति और भारतमाला परियोजना जैसे पहलों से इसका कैपेक्स 10-12 फीसदी बढ़ सकता है। सीमेंट पर जीएसटी की प्रस्तावित कटौती से भी सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा।


Road and Construction: KNR Construction, Ashoka Buildcon

बजट से उम्मीद है कि रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज (MoRTH) का आवंटन 5-6 फीसदी बढ़ सकता है। ऐसा होता है तो हाईवे प्रोजेक्ट में निजी निवेश भी बढ़ सकता है, खासतौर से बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल के तहत। इसके अलावा गांवों में सड़कों के विकास पर भी फोकस रहेगा और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की फंडिंग बढ़ सकती है। वित्त वर्ष 2026 के लिए मिनिस्ट्री का लक्ष्य नेशनल हाईवेज की लंबाई 12 हजार-13 हजार किमी बढ़ाने की है। मिनिस्ट्री के इस लक्ष्य से केएनआर कंस्ट्रक्शन और अशोका बिल्डकॉन को फायदा मिलेगा।

Power: Siemens, Thermax

पावर सेक्टक इस समय शॉर्ट टर्म की सुस्त मांग से जूझ रही है लेकिन सरकार का फोकस इस पर बना हुआ है। पिछले बजट में सरकार ने 16 फीसदी अधिक ₹20502 करोड़ का बजट पावर मिनिस्ट्री को आवंटित किया था और इस बार भी ऐसी ही उम्मीद लगाई जा रही है। सीमेंस को ट्रांसमिशन पाइपलाइन में बढ़ोतरी से फायदा मिल सकता है और रेवेन्यू रॉकेट की स्पीड से बढ़ सकता है। थर्मेक्स की बात करें तो इसका फोकस क्लीन एनर्जी और इंडस्ट्रियल पावर है। इंफ्रा पर बढ़ते निवेश और सस्टेनेबेल एनर्जी पर बढ़ते फोकस से इसे सपोर्ट मिल रहा है। जेफरीज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2024-27 में इंफ्रा और इंडस्ट्रियल कैपेक्स सालाना 13 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से बढ़ सकता है जोकि वित्त वर्ष 2011 से वित्त वर्ष 2020 के बीच 6 फीसदी की चक्रवृ्द्धि रफ्तार से बढ़ा था।

Defence: HAL, BEL

डिफेंस मिनिस्ट्री ने इस साल 2025 को ईयर ऑफ रिफॉर्म कहा है। मिनिस्ट्री का जोर मॉडर्नाजइेशन और स्वदेशीकरण पर है। बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर पर अधिक फोकस से डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियों को फायदा मिलेगा। जेफरीज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2024 से वित्त वर्ष 2030 के बीच डिफेंस पर खर्च सालाना 7-8 फीसदी की रफ्तार से बढ़ सकता है जिससे 5-6 साल में घरेलू मार्केट में कंपनियों के लिए 100-120 अरब डॉलर का मौका बन रहा है।

एचएएल का ऑर्डर वित्त वर्ष 2024 में 50-52 फीसदी बढ़कर करीब 40 हजार करोड़ बढ़ा और अब कंपनी का लक्ष्य इसे 60 हजार करोड़ रुपये पर ले जाने का है। जीई जैसी दिग्गज वैश्विक कंपनियों के साथ ज्वाइंट वेंचर के चलते डिफेंस सेक्टर में यह टॉप बेट है। स्वदेशी पर जोर के चलते जेफरीज का अनुमान है कि पांच साल में इसका ईपीएस सालाना 20 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से बढ़ेगा।

Railways: RVNL, BEML, IRFC

बजट से उम्मीद है कि रेलवे को इस बार 15-18 फीसदी अधिक पैसा मिल सकता है। सरकार का फोकस वंदे भारत ट्रेनों में निवेश समेत क्षमता बढ़ाने, रोलिंग स्टॉक बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्न करने पर है। मनीकंट्रोल की पहले के रिपोर्ट के मुताबिक सरकार 2025-26 में भारतीय रेलवे के लिए ग्रॉस बजटरी सपोर्ट (जीबीएस) के रूप में 2.9-3 लाख करोड़ रुपये आवंटित कर सकती है। 40 हजार बोगी को अपग्रेड करने और 10 हजार किमी को कवच एटीसीएस सिस्टम के तहत लाने का काम चल रहा है। ट्रैक मॉनिटरिंग और टिकटिंग में एआई के इस्तेमाल से एफिशिएंसी में सुझार होगा और 'मेक इन इंडिया' से नए अवसर पैदा होंगे।

Real Estate: Oberoi Realty, PNB Housing, AAVAS Financiers

रियल एस्टेट सेक्टर कच्चे माल की बढ़ती लागत और किफायती आवास की पुरानी हो चुकी परिभाषा से जूझ रहा है। किफायती आवास के मानकों में बदलाव और कर छूट, सब्सिडी और इंडस्ट्री का दर्जा जैसे प्रोत्साहनों से डेवलपर्स को बहुत जरूरी राहत मिल सकती है। नियमों को व्यवस्थित करने और अप्रूवल प्रोसेस को सरल बनाने से कॉमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर में विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। नीतिगत सपोर्ट जैसे कि महंगी जमीन और मैटेरियल्स की बढ़ती लागत को देखते हुए अफोर्डेबेल हाउसिंग के नियमों में बदलाव होता है तो पीएनबी हाउसिंग और आवास फाइनेंसर्स जैसे स्टॉक्स को फायदा मिलेगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) को फिर से लाया जाता है तो रियल एस्टेट सेक्टर को अच्छा सपोर्ट मिलेगा।

Consumption: HUL, ITC, Dabur, Marico, Emami

कंजम्प्शन को लेकर बात करें तो आईटीसी, डाबर मैरिको और एमामी पर नजर रखें। बजट से उम्मीद है कि सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन और टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट में बढ़ोतरी जैसे बड़े राहत दे सकती है ताकि आम लोगों के हाथ में अधिक डिस्पोजेल इनकम बचे। तेल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती होती है तो भी महंगाई का दबाव कम होगा और आम लोगों के पास खर्च के लिए अधिक पैसे बचेंगे।

शहरों में खपत गिरने के चलते कंजम्प्शन स्टॉक्स जैसे कि एचयूएल इस समय एक साल के हाई से करीब 22 फीसदी और आईटीसी करीब 16 फीसदी नीचे आ चुका है। महंगाई और हाई इनपुट कॉस्ट जैसी चुनौतियों के बावजूद अगर बजट में ऐसे ऐलान होते हैं जिससे खपत बढ़े तो एफएमसीजी स्टॉक्स में तेजी आ सकती है। सीएलएसए का ऐसा ही मानना है।

Renewables

Green Energy: Waaree Energies, Inox Wind, NTPC Green; Solar Energy: Adani Solar, Borosil Renewables, Sterling & Wilson

सरकार का रिन्यूएबल एनर्जी पर काफी जोर है और इसके चलते पिछले साल 2024 में अप्रैल से नवंबर के बीच रिन्यूएबल कैपेसिटी करीब 15 गीगावॉट बढ़ी। यह बढ़ोतरी सालाना आधार पर दोगुनी रही। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट की रिन्यूएबल एनर्जी का है और इसके लिए पीएम-कुसुम और ग्रीन हाइड्रोजन प्रोग्राम चल रहे हैं। अभी नॉन-फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी 214 गीगावॉट की है।

सोलर सेक्टर भी तेजी से आगे बढ़ रहा है और रूफटॉप सोलर कैपेटिसी को पीएम सूर्य घर योजना जैसे पहल के जरिए इस पर जोर दिया जा रहा है। सरकार प्रोजेक्ट एग्जेक्यूशन एफिसिएंसी को सुधारने के लिए नेशनल सोलर पोर्टल को बढ़ाने पर काम कर रही है और बैट्री एनर्जी स्टोरेज सिस्टम पर भी काम कर रही है ताकि ग्रिड मैनेजमेंट को बेहतर किया जा सके। अब जून 2026 से एक नया नियम लागू होने वाला है जिसके तहत सोलर सेल को सिर्फ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स की अप्रूव्ड लिस्ट में शामिल कंपनियों से ही लिया जा सकेगा और इससे सेक्टर को काफी फायदा मिलेगा।

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