Budget 2026 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद निफ्टी फ्यूचर्स में ट्रेडिंग की लागत साफ तौर पर बढ़ जाएगी। फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है, यानी इसमें करीब 150% की बढ़ोतरी हुई है।
रविवार, 1 फरवरी को बजट भाषण के बाद बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली। इस दिन BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घट गया। निफ्टी 50 इंडेक्स करीब 500 अंक टूटकर 24,825 पर बंद हुआ। यह 2020 के बाद बजट डे पर बाजार की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
निफ्टी फ्यूचर्स में STT कैसे बढ़ेगा
इस बढ़ोतरी को एक उदाहरण से समझते हैं। मान लेते हैं कि निफ्टी 24,800 के आसपास बंद हुआ।
पहले, जब STT 0.02% था, तब एक लॉट पर टैक्स करीब 322.4 रुपये लगता था। अब STT बढ़कर 0.05% होने के बाद एक ही लॉट पर टैक्स बढ़कर करीब 806 रुपये हो जाएगा। यानी सिर्फ STT के कारण ही ट्रेडिंग लागत में करीब 481 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
Avisa Wealth Creators के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर आदित्य अग्रवाल का कहना है, 'डेरिवेटिव्स पर STT में बढ़ोतरी से मौजूदा अस्थिर बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम और शॉर्ट टर्म सेंटिमेंट पर दबाव पड़ सकता है।'
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही बायबैक टैक्सेशन को सरल बनाना एक पॉजिटिव कदम है। अब बायबैक से मिलने वाली रकम को शेयरधारकों के हाथ में कैपिटल गेन के तौर पर टैक्स किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कैपिटल एलोकेशन ज्यादा प्रभावी होगा।
ट्रेडर्स पर क्या होगा असर?
STT बढ़ने का सीधा असर डेरिवेटिव्स ट्रेड करने वाले निवेशकों और ट्रेडर्स पर पड़ेगा। खासकर जो लोग बार-बार ट्रेड करते हैं, उनके लिए कुल लागत काफी बढ़ जाएगी। इससे शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी पर दबाव बन सकता है।
अब निवेशकों और ट्रेडर्स की नजर इस बात पर रहेगी कि बढ़े हुए STT का ट्रेडिंग वॉल्यूम पर कितना असर पड़ता है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि बाजार इस बजट डे की गिरावट से कितनी जल्दी उबर पाता है और डेरिवेटिव्स सेगमेंट में गतिविधि किस तरह बदलती है।
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