बाजार नए-नए शिखर बना रहा है। घरेलू निवेशकों के दम पर मार्केट में इस साल अब तक रिकॉर्डतोड़ तेजी रही है। अब फेड रेट कट से इसे नए पंख मिल गए हैं। ऐसे माहौल में निवेशक नए मौके तलाशेंगे। कंपनियों के कारोबार से लेकर उनकी वित्तीय स्थिति का आंकलन करेंगे। अगर सब ठीक-ठीक लगा तो निवेश से पहले ब्रोकरेज की राय भी ली जाएगी। लेकिन इसी मोड़ पर कंफ्यूजन का दौर शुरू होता है। एक ही शेयर पर कोई ब्रोकरेज हाउस बुलिश होता है तो कोई बियरिश। आखिर, शेयरों पर ब्रोकरेज का राय बंटी हुई क्यों है।
