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Crompton Greaves में नहीं शामिल होगी Butterfly, पब्लिक शेयरहोल्डर्स ने विलय के खिलाफ दिया वोट

क्रॉम्पटन ग्रीव्स कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स (Crompton Greaves Consumer Electricals) और बटरफ्लाई गांधीमठी (Butterfly Gandhimathi) का विलय नहीं होगा। बटरफ्लाई गांधीमठी के पब्लिक शेयरहोल्डर्स ने इसके खिलाफ भारी बहुमत दिया। क्रॉम्पटन ग्रीव्स ने 30 अक्टूबर को एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी। जानिए विलय योजना क्या थी और इसके खिलाफ कितने वोट पड़े हैं और अब विलय खारिज होने पर कंपनी का क्या कहना है?

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Oct 31, 2023 पर 10:36 AM
Crompton Greaves में नहीं शामिल होगी Butterfly, पब्लिक शेयरहोल्डर्स ने विलय के खिलाफ दिया वोट
Butterfly और Crompton Greaves के मर्जर रेश्यो के हिसाब से बटरफ्लाई के शेयरहोल्डर्स को 7 फीसदी मुनाफा मिलता लेकिन इसके बावजूद विलय के खिलाफ वोट पड़े।

क्रॉम्पटन ग्रीव्स कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स (Crompton Greaves Consumer Electricals) और बटरफ्लाई गांधीमठी (Butterfly Gandhimathi) का विलय नहीं होगा। बटरफ्लाई गांधीमठी के पब्लिक शेयरहोल्डर्स ने इसके खिलाफ भारी बहुमत दिया। क्रॉम्पटन ग्रीव्स ने 30 अक्टूबर को इसका ऐलान किया। एक्सचेंज फाइलिंग में दी गई जानकारी के मुताबिक विलय के प्रस्ताव को बटरफ्लाई के पब्लिक शेयरहोल्डर्स को मिलाकर सभी इक्विटी शेयरहोल्डर्स के तीन-चौथाई की मंजूरी यानी बहुमत मिल गया था लेकिन पब्लिक शेयरहोल्डर्स की तरफ से बहुमत नहीं मिला। Crompton Greaves ने 25 मार्च को इस विलय का ऐलान का ऐलान किया था और उसके ठीक एक साल पहले मार्च 2022 में चेन्नई की कंपनी बटरफ्लाई में कंट्रोलिंग स्टेक खरीदा था। विलय के प्रस्ताव के मुताबिक बटरफ्लाई के निवेशकों को हर पांच शेयर के बदले में क्रॉम्पटन ग्रीव्स के 22 शेयर मिलने थे।

7% मुनाफे के बावजूद विलय के खिलाफ 72% वोट

मर्जर रेश्यो के हिसाब से बटरफ्लाई के शेयरहोल्डर्स को 7 फीसदी मुनाफा मिलता लेकिन इसके बावजूद विलय के खिलाफ वोट पड़े। 30 अक्टूबर को क्रॉम्पटन ग्रीव्स के शेयर NSE पर 283.90 और बटरफ्लाई के शेयर 1,160.10 रुपये पर बंद हुए थे। क्रॉम्पटन के मुताबिक बटरफ्लाई के 17.12 लाख नॉन-इंस्टीट्यूशनल पब्लिक इनवेस्टर्स ने वोट किया था और इसमें से 16.62 लाख यानी 97.04 फीसदी ने विलय के खिलाफ वोट किया। वहीं इंस्टीट्यूशनल पब्लिक इनवेस्टर्स की बात करें तो 11.59 लाख वोट में 4.30 लाख यानी महज 37.15 फीसदी ही विलय के खिलाफ रहे। ओवरऑल पब्लिक इनवेस्टर्स की बात करें तो 28.82 लाख वोट में 20.93 लाख यानी 72.61 फीसदी विलय के खिलाफ पड़े।

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