Sugar stocks : DAM कैपिटल ने एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इथेनॉल मिश्रण नीतियों पर स्पष्टता आने और चीनी मिलों द्वारा डिस्टिलरी क्षमताओं के पूर्ण उपयोग के चलते वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही से चीनी कंपनियों की आय में मजबूत ग्रोथ होगी। इसके परिणामस्वरूप आगे चलकर इस सेक्टर की पुनः रेटिंग भी होगी। ब्रोकरेज ने बलरामपुर चीनी मिल्स, त्रिवेणी इंजीनियरिंग और डालमिया भारत शुगर जैसी बड़ी चीनी कंपनियों के लिए अपनी "Buy" सिफारिश को बनाए रखा है। DAM कैपिटल का कहना है कि सरकार द्वारा गन्ने के रस और बी-हैवी गुड़ से इथेनॉल उत्पादन पर प्रतिबंध हटाने के हालिया फैसले से नए सीजन के शुरू होने से पहले इथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा 29 अगस्त को जारी एक अधिसूचना में सरकार ने घोषणा की है कि अब गन्ने के रस, बी-हैवी, सी-हैवी गुड़ और अनाज सहित सभी उपलब्ध फीडस्टॉक्स से इथेनॉल का उत्पादन किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, चीनी मिलों और स्टैंडअलोन डिस्टिलरी को अब इथेनॉल उत्पादन के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) से 2.3 मिलियन टन चावल खरीदने की अनुमति होगी।
सरकार के इस कदम ने दिसंबर 2023 में लागू की गई नीतियों को उलट दिया है। पिछली निति में 2024 के आम चुनाव के मद्देनजर चीनी की बढ़ती कीमतों के कारण इन तरीकों से इथेनॉल उत्पादन को प्रतिबंधित कर दिया गया था। DAM Capital के मुताबिक इन बदलावों को देखते हुए 2024-25 सीज़न के लिए इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को फिर से सक्रिय किए जाने की उम्मीद है।
भारत में चीनी का मौजूदा स्टॉक 1 अक्टूबर तक 8 मिलियन टन से अधिक होने का अनुमान है। ये 5 मिलियन टन की न्यूनतम जरूरत से काफी ज्यादा है। वही, कुल चीनी उत्पादन 32 मिलियन टन रहने की उम्मीद है, जो 29 मिलियन टन की खपत दर को पार कर जाएगा। इथेनॉल उत्पादन के लिए 5 मिलियन टन से अधिक अधिशेष उपलब्ध होगा। डीएएम कैपिटल का अनुमान है कि लगभग 4-5 मिलियन टन चीनी इथेनॉल उत्पादन की ओर भेज दी जा सकती जो 4.5 से 5 बिलियन लीटर इथेनॉल के उत्पादन के लिए पर्याप्त है। सरकार के इस कदम से चीनी कंपनियों को अपनी डिस्टिलरी क्षमताओं का पूरा उपयोग करने की सहूलियत मिलने की उम्मीद हैजो पिछले सीजन में फीडस्टॉक प्रतिबंधों के कारण लगभग 60-70 प्रतिशत कम उपयोग स्तर पर रही थी।
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इससे अनाज आधारित इथेनॉल की इकोनॉमी में सुधार होगा। इथेनॉल उत्पादन के लिए एफसीआई चावल की उपलब्धता, पर्याप्त गुड़ की आपूर्ति के साथ, अनाज इथेनॉल के लिए परिचालन मार्जिन में बढ़त होने की उम्मीद है। इसको 10-12 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है, "हमारा मानना है कि 2024-25 खरीद वर्ष से अनाज इथेनॉल इकोनॉमी में काफी सुधार होगा।"
मौजूदा इन्वेंट्री स्तरों और डिस्टिलरी उपयोग दरों में अनुमानित बढ़त को देखते हुए डीएएम कैपिटल बड़ी चीनी कंपनियों को लेकर बुलिश है। ब्रोकरेज ने बलरामपुर चीनी मिल्स को लेकर सबसे ज्यादा बुलिश है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि बलरामपुर चीनी अपने डिस्टिलरी कारोबार के जरिए वित्त वर्ष 2026 तक 320 मिलियन लीटर इथेनॉल/ईएनए (एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल) का उत्पादन करेगा।
पिछले साल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक नए संयंत्र के अधिग्रहण के बाद त्रिवेणी इंजीनियरिंग को भी और ज्यादा गन्ना पेराई से लाभ होने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026 तक त्रिवेणी इंजीनियरिंग की डिस्टिलरी उत्पादन मात्रा 220 मिलियन लीटर तक पहुंच जाएगी। इस बीच, डालमिया भारत शुगर से उम्मीद है कि वह अपनी अनाज डिस्टिलरी क्षमता का पूरा इस्तेमाल करेगी जिससे वित्त वर्ष 2026 तक अनुमानित 220 मिलियन लीटर इथेनॉल का उत्पादन होगा।
हालांकि,द्वारिकेश शुगर को अपने करीब के इलाके में गन्ने की उपलब्धता की कमी के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उत्पादन में कमी का कारण रेड-रोट रोग है। इस बात को ध्यान में रखते हुए डीएएम कैपिटल ने द्वारिकेश शुगर के लिए "Sell" कॉल बनाए रखी है।
सुबह 10 बजे के आसापास डालमिया भारत के शेयरों में 2 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही थी। वहीं, बलरामपुर चीनी मिल्स, त्रिवेणी इंजीनियरिंग और द्वारिकेश शुगर के शेयरों में 0.7-1.0 फीसदी की गिरावट नजर आ रही थी।