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Crude oil price : 4 साल के निचले स्तर पर क्रूड, ONGC और ऑयल इंडिया 9% से ज्यादा टूटे, आगे क्या हो रणनीति ?

Crude oil news: ब्रेंट क्रूड 64 डॉलर से नीचे चला गया है। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 60 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा है। सऊदी तेल की कीमतों में कटौती और ट्रंप के टैरिफ वार से मंदी का आशंका बढ़ी है। इसके चलते तेल को लेकर बनी की निराशा और गहरी हुई है

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 07, 2025 पर 2:33 PM
Crude oil price : 4 साल के निचले स्तर पर क्रूड, ONGC और ऑयल इंडिया 9% से ज्यादा टूटे, आगे क्या हो रणनीति ?
Market Outlook : कच्चे तेल के ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंचने के साथ अब कुछ टेक्निकल पुलबैक से इंकार नहीं किया जा सकता है,लेकिन निवेशक सतर्क बने हुए हैं। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्मों को उम्मीद है कि अगर जियोपोलिटिकल स्थितियां खराब बनी रहती हैं तो तेल में वोलैटिलिटी बनी रहेगी

Market news: सोमवार, 7 अप्रैल को सरकारी तेल उत्पादक कंपनियों ONGC और Oil India के शेयरों में भारी गिरावट आई। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें कई साल के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। सऊदी अरब की कीमतों में कटौती रणनीति और डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बढ़त से जुड़ी चिताओं के कारण क्रूड की कीमतों में कमी आई। ब्रेंट क्रूड करीब 4 फीसदी गिरकर 63.21 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। ये 2021 के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड चार साल में पहली बार 60 डॉलर के लेवल को तोड़ते हुए 59.79 डॉलर पर आ गया है। ग्लोबल डिमांड में मंदी की आशंकाओं के बीच पिछले सप्ताह भी ब्रेंट में 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।

शेयर बाजार पर नजर डालें तो ONGC के शेयर इंट्राडे में 9.3 फीसदी गिरकर 205 रुपए पर आ गए, जबकि ऑयल इंडिया थोड़ी रिकवरी के पहले 9.15 फीसदी गिरकर 325 रुपए पर आ गया। ONGC इस समय सालाना आधार पर 10 फीसदी से ज्यादा नीचे है। वहीं, ऑयल इंडिया 2025 में अब तक 23 फीसदी से अधिक टूट चुका है।

कच्चे तेल की गिरती कीमतों से ONGC और ऑयल इंडिया को परेशानी क्यों?

ONGC और ऑयल इंडिया अपस्ट्रीम तेल कंपनियां हैं तो कच्चा तेल निकालती हैं। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त होने पर ही इनके कमाई और मुनाफे में बढ़त होती है। जब कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं तो इन कंपनियों की प्रति बैरल कमाई और मुनाफा कम हो जाता है। इसके अलावा,अगर रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतें तेजी से नहीं गिरती हैं, तो महंगी इन्वेंट्री रखने वाले रिफाइनरों को इन्वेंट्री घाटा उठाना पड़ सकता है।

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