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Daily Voice: मैन्यूफैक्चरिंग और इंफ्रा सेक्टर में बनेंगे पैसे, ग्लोबल फैक्टर्स से जुड़ी कंपनियों से रहें दूर

इन्वेस्टमेंट बैंकिंग का 22 सालों से ज्यादा की अनुभव रखने वाले भावेश शाह का मानना है कि भारत की इकोनॉमी से जो संकेत मिल रहे हैं उनसे लगता है कि हमारी इकोनॉमी गोल्डीलॉक्स इकोनॉमी (Goldilocks economy)बनने के कगार पर है। जहां महंगाई नियंत्रण में है और एक्सटर्नल रिकवरी के दम पर घरेलू इकोनॉमी मजबूत ग्रोथ के लिए तैयार नजर आ रही है

Sunil Matkarअपडेटेड Apr 18, 2023 पर 3:35 PM
Daily Voice: मैन्यूफैक्चरिंग और इंफ्रा सेक्टर में बनेंगे पैसे, ग्लोबल फैक्टर्स से जुड़ी कंपनियों से रहें दूर
जो कंपनियां ईवी कंपोनेंट से उत्पादन से जुड़ी हुई हैं उनमें आगे अच्छी ग्रोथ देखने को मिलेगी। इसके अलावा अभी भारत में बैटरी सेल का अधिकांश हिस्सा आयात होता है। अगले कुछ सालों में हमें इस सेक्टर में जोरदार स्वेदशीकरण होता दिखेगा। ऐसे में ऑटो एंसिलरी कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए

Daily Voice: कैपेक्स पर सरकार का जोर सिर्फ एक साल के लिए नहीं है, बल्कि ये फोकस कई सालों तक बना रहेगा है। इस समय मैन्यूफैक्चरिंग और इंफ्रा सेक्टर के लिए कई अच्छे फैक्टर काम कर रहे हैं। निवेशकों को मौके का फायदा उठाकर इन सेक्टरों के क्वालिटी शेयरों पर दांव लगाना चाहिए। ये बातें इक्विरस (Equirus) में इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड भावेश शाह ने मनीकंट्रोल को दिए गए एक साक्षात्कार में कही हैं। कंपनियों के नतीजों पर बात करते हुए भावेश शाह ने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में अर्निंग में बहुत व्यापक गिरावट की उम्मीद नहीं है। कुछ खास सेक्टर और कंपनियां जो देश के बाहरी मामलों से जुड़ी हुई हैं। उन्हीं की अर्निंग पर कुछ निगेटिव असर देखने को मिल सकता है।

इन्वेस्टमेंट बैंकिंग का 22 सालों से ज्यादा की अनुभव रखने वाले भावेश शाह का मानना है कि भारत की इकोनॉमी से जो संकेत मिल रहे हैं उनसे लगता है कि हमारी इकोनॉमी गोल्डीलॉक्स इकोनॉमी (Goldilocks economy)बनने के कगार पर है। जहां महंगाई नियंत्रण में है और एक्सटर्नल रिकवरी के दम पर घरेलू इकोनॉमी मजबूत ग्रोथ के लिए तैयार नजर आ रही है। इसके अलावा देश की राजनीतिक स्थिरता और सरकार की तरफ रिफॉर्म के लिए उठाए जा रहे कदम से भी इकोनॉमी को अच्छा सपोर्ट मिल रहा है।

रेलवे और रोड से जुड़ी कंपनियां आगे करेंगी अच्छा प्रदर्शन

इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि ग्रोथ की व्यापक संभावाओं, राजनीतिक स्थिरता और मजबूत बैलेंस सीट के चलते भारत दुनिया भर के निवेशकों के लिए एक अच्छा बाजार बना हुआ है। हालांकि ग्लोबल बैंकिंग संकट, बढ़ती महंगाई और जियो पॉलिटिकल तनाव जैसी ग्लोबल चुनौतियां भारतीय बाजार में वोलैटिलिटी बनाए रह सकती हैं। उन्होंने आगे कहा कि इन बातों को ध्यान में रखते हुए हमें ऐसी कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो घरेलू खपत में बढ़त और सरकार द्वारा किए जाने वाले खर्चे से फायदे में रह सकती हैं। ऐसी कंपनियों में रेलवे और रोड से जुड़ी कंपनियां आगे काफी अच्छा करती नजर आ सकती हैं।

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