इस हफ्ते ये 10 प्वाइंट्स तय करेंगे बाजार की चाल, लगातार दो हफ्ते रही है गिरावट

अगले कारोबारी सप्ताह की बात करें ट्रेडर्स का फोकस आरबीआई पॉलिसी, मासिक F&O एक्सपायरी और वैश्विक संकेतों पर रहेगा

अपडेटेड Sep 26, 2022 पर 2:07 AM
पिछले हफ्ते सेंसेक्स 742 प्वाइंट्स यानी 1.26 फीसदी की गिरावट के साथ 58,099 और निफ्टी 1.16 फीसदी टूटकर 17,327 पर फिसल गया।

अमेरिकी फेड ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दिया है जिसके चलते दुनिया भर के बाजारों में उठा-पटक दिख रही है। भारत की बात करें तो लगातार दूसरे हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी 50 में फिसलन रही। सेंसेक्स 742 प्वाइंट्स यानी 1.26 फीसदी की गिरावट के साथ 58,099 और निफ्टी 1.16 फीसदी टूटकर 17,327 पर फिसल गया। ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर के अलावा सभी सेक्टर्स में बिकवाली का दबाव रहा।

अब अगले कारोबारी सप्ताह की बात करें ट्रेडर्स का फोकस आरबीआई पॉलिसी, मासिक F&O एक्सपायरी और वैश्विक संकेतों पर रहेगा। यहां ऐसे दस प्रमुख कारकों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है जिन पर अगले हफ्ते निगाहें रहेंगी।

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आरबीआई का रेपो रेट पर फैसला

अगले कारोबारी हफ्ते में आरबीआई रेपो रेट पर फैसला करेगा। मौद्रिक नीतियों की समिति (MPC) रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकती है। फोरेक्स मार्केट में मौजूदा स्थितियों को देखते हुए इसमें 50 बीपीएस (0.50 फीसदी) की बढ़ोतरी के आसार जताए जा रहे हैं। आरबीआई रेपो रेट को लेकर क्या फैसला करता है, इस पर बाजार की निगाहें रहेंगी।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक महंगाई दर 7 फीसदी के उच्च स्तर पर बनी हुई है और इसके जल्द नीचे आने के आसार नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में रेट हाइक की संभावना बहुत अधिक दिख रही है।

रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया

शुक्रवार को लगातार आठवें दिन रुपया कमजोर हुआ और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 80.99 रुपये के भाव पर बंद हुआ। डॉलर की मजबूती, यूक्रेन और रूस के बीच बढ़ते तनाव, अमेरिकी फेड और बैंक ऑफ इंग्लैंड समेत कुछ केंद्रीय बैंकों की सख्त आक्रामक नीति और घरेलू इक्विटी मार्केट में कमजोरी के चलते रुपये पर दबाव बढ़ा।

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एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) जतीन त्रिवेदी के मुताबिक जब तक महंगाई से जुड़ी राहत नहीं मिलती है, रुपये में गिरावट जारी रहेगी। इसके अलावा आरबीआई की एमपीसी से भी इसे कुछ राहत मिल सकती है। एमपीसी से पहले रुपया 80.50-81.55 रुपये की रेंज में रह सकता है।

डॉलर कई साल के हाई पर

अगले कारोबारी हफ्ते में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स पर भी निगाहें रहेगी जो दुनिया की छह दिग्गज करेंसीज के बास्केट के मुकाबले डॉलर की वैल्यू तय करती है। पिछले डेढ़ महीने में यह 7 फीसदी से अधिक मजबूत होकर 113 पर पहुंच गया। यह मई 2002 के बाद से सबसे अधिक है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली

23 सितंबर को समाप्त होने वाले हफ्ते में लगातार दूसरे सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने खरीदारी से अधिक बिकवाली की। मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के चलते उन्होंने 4362 करोड़ डॉलर की नेट बिक्री की। अगर अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और 10 साल का ट्रेजरी यील्ड बॉन्ड मजबूत बना रहता है तो एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों) की बिकवाली जारी रहेगी। वहीं दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों ने पिछले हफ्ते 1100 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी की।

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वैश्विक आर्थिक डेटा

अगले हफ्ते अमेरिका में जून तिमाही के जीडीपी के आंकड़े आएंगे जिस पर दुनिया भर के निवेशकों की निगाहें रहेंगी। वहीं यूरो एरिया में भी अगले हफ्ते अगस्त के रोजगार आंकड़े, सितंबर के इकनॉमिक, इंडस्ट्रियल और सर्विसेज सेटिमेंट्स आंकड़े आएंगे। जापान में भी अगस्त के इकनॉमिक आंकड़े जारी होंगे और चीन में सितंबर की पीएमआई के आंकड़े पेश होंगे।

तेल की कीमतें

डॉलर की मजबूती और मंदी की आशंका के चलते पिछले हफ्ते तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा और गिरावट आई। इंटरनेशनल ब्रेंट क्रूड 86.15 डॉलर के भाव पर बंद हुआ जो जनवरी 2022 के बाद से सबसे कम है। पिछले साढ़े तीन महीने में यह 30 फीसदी कमजोर हुआ है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर तेल के भाव में आगे भी गिरावट होती है तो यह आरबीआई की मौद्रिक नीतियों को सपोर्ट करेगी क्योंकि भारत तेल के बड़े आयातकों में शामिल है।

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तकनीकी व्यू

पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को निफ्टी 50 ने 17400-17500 के सपोर्ट लेवल को ब्रेक करने के बाद साप्ताहिक और डेली चार्ट पर बियरिश कैंडलस्टिक पैटर्न बनाया। ऐसे में एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि यह 17150 के लेवल को ब्रेक कर इससे नीचे फिसल सकता है। आने वाले दिनों में यह 17 हजार से भी नीचे गिर सकता है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी के मुताबिक मौजूदा कमजोरी के चलते निफ्टी नियर टर्म में 17000-16900 के लेवल तक फिसल सकता है।

मासिक F&O एक्सपायरी सप्ताह

18100 के लेवल से करीब 4 फीसदी से अधिक फिसलने के बाद ऑप्शन डेटा से संकेत मिलते हैं कि निफ्टी 50 के लिए 16800-17800 के ब्रॉड रेंज में गिरावट का रूझान रहा। वहीं इम्मेडिएट टर्म की बात करें निफ्टी 17000-17600 की रेंज में ट्रेड हो सकता है। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले कारोबारी हफ्ते में यह वोलैटिलिटी अधिक रह सकती है क्योंकि यह सितंबर महीने के F&O कांट्रैक्ट्स का एक्सपायरी सप्ताह है।

आईपीओ

हर्षा इंजीनियर्स इंटरनेशनल सोमवार को घरेलू मार्केट में लिस्ट होगा। इसे आईपीओ निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला और 74.40 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसका इश्यू प्राइस 330 रुपये प्रति शेयर है। ग्रे मार्केट प्रीमियम के हिसाब से संकेत मिल रहे हैं कि हर्षा इंजीनियर्स 50 फीसदी से अधिक प्रीमियम पर लिस्ट हो सकती है।

कॉरपोरेट एक्शन और इकनॉमिक डेटा

अगले हफ्ते अगस्त महीने के राजकोषीय घाटे और इंफ्रा आउटपुट के आंकड़े आएंगे। इसके अलावा सितंबर की बिक्री के आंकड़े भी आएंगे जिसके चलते ऑटो शेयरों पर फोकस रहेगा। कॉरेपोरेट एक्शन की बात करें तो भारत गियर्स, पोंडी ऑक्साइज एंड केमिकल्स और राम रत्न वायर्स एक्स-बोनस ट्रेडिंग शुरू करेंगे। अगले हफ्ते के कॉरपोरेट एक्शन के बारे में नीचे दिया जा रहा है।

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