Resourceful Auto के आईपीओ के ओवरसब्सक्रिप्शन पर दीपक शेनॉय ने जताई अलग राय, कहा-इस पर बहस मूर्खतापूर्ण है

रिसोर्सफुल ऑटोमोबाइल के आईपीओ में निवेशकों ने जबर्दस्त दिलचस्पी दिखाई। इससे यह आईपीओ 400 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसके बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर नई बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने इस एसएमई आईपीओ में निवेशकों की दिलचस्पी को क्रेजी बताया

अपडेटेड Aug 28, 2024 पर 5:56 PM
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रिसोर्सफुल ऑटोमोबाइल के दिल्ली में यामाहा के सिर्फ दो शोरूम हैं, जो साहनी ऑटोमाबाइल्स ब्रांड नाम से हैं।

कैपिटल माइंड के फाउंडर दीपक शेनॉय ने हाल में आए एक एसएमई आईपीओ के बारे में अलग राय दी है। रिसोर्सफुल ऑटोमोबाइल के इस आईपीओ में निवेशकों ने जबर्दस्त दिलचस्पी दिखाई थी। यह 400 गुना ओवरसब्सक्राइब हुआ था, जिसके बाद इसे लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नई बहस शुरू हो गई थी। रिसोर्सफुल ऑटोमोबाइल के दिल्ली में यामाहा के सिर्फ दो शोरूम हैं, जो साहनी ऑटोमाबाइल्स ब्रांड नाम से हैं। इस कंपनी में करीब 8 लोग काम करते हैं। आईपीओ में इसके शेयर की कीमत 117 रुपये है। ग्रे मार्केट में शेयर पर 72 फीसदी प्रीमियम की चर्चा है।

सोशल मीडिया पर ओवरसब्सक्रिप्शन को लेकर बहस

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस आईपीओ में निवेशकों की दिलचस्पी के बारे में कई तरह की प्रतिक्रिया जताई गई है। कुछ ने इसे क्रेज बताया है तो कुछ ने इसे पागलपन कहा है। कुछ यूजर्स का कहना है कि यह आईपीओ इस बात का संकेत हैं कि एसएमई सेगमेंट में जरूरत से ज्यादा निवेश हो रहा है। कैपिटल माइंड (Capital Mind) के फाउंडर दीपक शेनॉय ने इस आईपीओ के बारे में अलग तरह की राय जताई है।


एसएमई एक्सचेंज को लेकर बड़ी बातों की अनदेखी कर रहे

शेनॉय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है कि इस आईपीओ के ओवरसब्सक्रिप्शन का हो रहा विरोध मूर्खतापूर्ण है। कंपनी को कितने पैसे मिले हैं, इस बारे में सही जानकारी नहीं है। एसएमई एक्सचेंज को लेकर लोग बड़ी बातों की अनदेखी कर रहे हैं। चुनाव करने का अधिकार निवेशक को हासिल है और यह उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने लिखा है कि वह इस आईपीओ में निवेश नहीं कर रहे हैं। इसमें कोई समस्या नहीं क्योंकि दूसरे मौके आएंगे।

ओवरसब्सक्रिप्शन को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं

शेनॉय ने लिखा है कि ओवरसब्सक्रिप्शन को लेकर चिंता नहीं होनी चाहिए। इसकी वजह यह है कि आपका पैसा आपके बैंक अकाउंट में रहता है। आपको आसानी से शेयर नहीं मिलते हैं। इसलिए अगर आपको शेयर एलॉट नहीं होते हैं तो पैसा रिलीज कर दिया जाता है जो आपके अकाउंट में पड़ा रहता है। इस पर इंटरेस्ट मिलता है। इसलिए आजकल ओवरसब्सक्रिप्शन पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है।

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कई यूजर्स ने जताई हैरानी

उन्होंने कहा है कि छोटे आईपीओ ओवरसब्सक्राइब्ड हो रहे हैं, क्योंकि निवेशक बड़े आईपीओ में निवेश के लिए फंड के बड़े स्रोत से कटे हुए हैं। हालांकि, सोशल मीडिया के यूजर्स को इस आईपीओ ने चौंकाया है। उन्हें इस बात की हैरानी है कि एक कंपनी जो छोटी रकम जुटाना चाहती है उस पर 2,700 करोड़ रुपये के दांव लगा दिए गए।

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