Trump Tariff Effect: ट्रंप टैरिफ मार्केट को काफी नुकसान पहुंचा चुका है, अब रिकवरी की बारी है

व्हाइट ओक कैपिटल के फाउंडर प्रशांत खेमका का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी मार्केट को काफी नुकसान पहुंचा चुकी है। अब बारी रिकवरी की है। बैंकिंग और कंजम्प्शन ऐसे सेक्टर हैं, जो पूरी तरह के घरेलू अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं। ग्लोबल टैरिफ का इन पर बड़ा असर पड़ने वाला नहीं है

अपडेटेड Apr 08, 2025 पर 5:14 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
खेमका ने कहा कि मार्केट के लॉन्ग टर्म रिटर्न को लेकर उम्मीदें नहीं बदलनी चाहिए। इंडियन मार्केट्स से डबल डिजिट रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ का असर मार्केट पर जितना पड़ना था, उतना पड़ चुका है। अब आने वाली खबरें उतनी बुरी नहीं होगी। व्हाइट ओक कैपिटल के फाउंडर प्रशांत खेमका का यह मानना है। उन्होंने कहा कि भविष्य की घटनाओं का असर मार्केट पर पहले ही पड़ जाता है। उन्होंने कोविड का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कोविड के समय कंपनियों की अर्निंग्स को लेकर तस्वीर अनिश्चित दिख रही थी। कंपनियों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा था। लेकिन, मार्केट 23 मार्च, 2020 को बॉटम बनाने के बाद चढ़ने लगा।

मार्केट पर खराब खबरों का असर पहले ही पड़ जाता है

खेमका ने कहा कि मार्केट कभी सभी डेटा के आने का इंतजार नहीं करता है। उन्होंने कहा कि फिर से ऐसा देखने को मिल सकता है। बातचीत के बाद ट्रंप (Donald Trump) यह ऐलान कर सकते हैं कि कुछ सेगमेंट पर उन्होंने टैरिफ 30 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी कर दिया है। इसके बाद मार्केट में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। संरक्षणवाद का निगेटिव असर इकोनॉमी पर पड़ना जारी रहेगा। लेकिन, ट्रंप से जुड़े हर पॉजिटिव खबर पर मार्केट में तेजी दिख सकती है।


अर्निंग्स ग्रोथ 10-11 फीसदी रह सकती है

उन्होंने कहा कि मार्केट के लॉन्ग टर्म रिटर्न को लेकर उम्मीदें नहीं बदलनी चाहिए। इंडियन मार्केट्स से डबल डिजिट रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है। अमेरिकी मार्केट का रिटर्न हाई सिंगल डिजिट में रह सकता है। उन्होंने कहा कि इंडिया में अर्निंग्स आउटलुक अच्छा दिख रहा है। कुछ पॉकेट्स में रिस्क तो कुछ में रिकवरी दिख रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथलपुथल के बावजूद इंडिया में कंपनियों की अर्निंग्स को लेकर आउटलुक नहीं बदला है। FY26 में अर्निंग्स ग्रोथ 10-11 फीसदी के बीच रह सकती है।

यह भी पढ़ें: Stock Markets: एक झूठी खबर ने अमेरिकी मार्केट में भरी हवा, इंडिया में ऐसा हुआ तो क्या होगा?

इंडिया में कई सेक्टर घरेलू इकोनॉमी पर निर्भर हैं

खेमका ने कहा कि अगर आप इंडियन इंडस्ट्रीज के बड़े कंपोनेंट्स को देखें तो बैंकिंग और कंजम्प्शन ऐसे सेक्टर हैं, जो पूरी तरह के घरेलू अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं। ग्लोबल टैरिफ का इन पर बड़ा असर पड़ने वाला नहीं है। यहां तक कि आईटी की हिस्सेदारी प्रमुख सूचकांक में सिर्फ 9-10 फीसदी है। कमोडिटीज की हिस्सेदारी करीब 3 फीसदी है। अगर कंजम्प्शन की बात की जाए तो यह दबाव में बना हुआ है। लेकिन, ऐसा लगता है कि इसका बुरा दौर खत्म हो रहा है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।