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El Nino Effect : कमजोर मॉनसून से निपटने के लिए सरकार की तैयारी शुरू,क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप बना

El Nino Effect :सरकार की मौसम,बुवाई,बीजों की उपलब्धता और जलाशयों के जलस्तर पर नजर रहेगी। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए 240 से अधिक जिलों के लिए कंटीजेंसी प्लान बनाया गया है। नेशनल सीड रिजर्व में अतिरिक्त रिजर्व रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों को समय-समय पर मॉनसून की जानकारी दी जाएगी

Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Jun 03, 2026 पर 1:50 PM
El Nino Effect : कमजोर मॉनसून से निपटने के लिए सरकार की तैयारी शुरू,क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप बना
El Nino Effect : किसानों के सूखा रेसिलिएंट फसलों की खेती की सलाह दी जा रही है

El Nino Effect : सरकार ने कमजोर मॉनसून और अल नीनो से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए केंद्र सरकार ने एक क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप बनाया। मॉनसून के हालात की समीक्षा के लिए हर हफ्ते बैठक होगी। अल नीनो के चलते इस साल बारिश में कमी की आशंका है। इससे निपटने के लिए सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। क्राइसिस मैनेजमेंट को लेकर सरकार का क्या प्लान है और क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं,इस पर और ज्यादा जानकारी देते हुए सीएनबीसी-आवाज संवाददाता असीम मनचंदा ने कहा कि मॉनसून पर सरकार अलर्ट मोड में आ गई है।

इस बार मॉनसून सीजन में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। अल नीनो का मॉनसून के ऊपर खराब असर पड़ने की आशंका है। अल नीनो के असर पर सरकार की करीबी नजर है। मॉनसून की खराब स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप का गठन किया है। आपदा प्रबंधन और राज्यों के अधिकारी इस ग्रुप में शामिल हैं। इसके अलावा मौसम और फसलों की निगरानी के लिए वेदर वॉच ग्रुप बनाया गया है। राज्यों को आपातकालीन योजनाओं के साथ कम समय में पकने वाली किस्मों के बीज का 1% बफर स्टॉक रखने को कहा गया है।

हालात की समीक्षा के लिए हर हफ्ते इस ग्रुप की बैठक होगी। सरकार की मौसम,बुवाई,बीजों की उपलब्धता और जलाशयों के जलस्तर पर नजर रहेगी। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए 240 से अधिक जिलों के लिए कंटीजेंसी प्लान बनाया गया है। नेशनल सीड रिजर्व में अतिरिक्त रिजर्व रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों को समय-समय पर मॉनसून की जानकारी दी जाएगी। किसानों के सूखा रेसिलिएंट फसलों की खेती की सलाह दी जा रही है।

पश्चिम एशिया संकट को ध्यान में रखते हुए आयोजित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में खाद्य और उर्वरक सुरक्षा से संबंधित चिंताओं पर चर्चा के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने यह जानकारी दी है। मंत्रालय ने कहा कि राज्यों को एक प्रतिशत बीज भंडार बनाए रखने के लिए कहा गया है,जिसमें कम और मध्यम अवधि में पकने वाली फसलों की किस्मों पर विशेष जोर दिया गया है। इस सीजन के लिए सरकार ने पहले से ही उर्रवरकों (यूरिया और डीएपी) का भंडारण 51 फीसदी कर लिया है,जो सामान्यतौर पर 33 फीसदी होता है।

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