शेयरों के निवेशकों को मिल सकती है टैक्स में बड़ी राहत! STT और LTCG नियमों में बदलाव पर विचार कर रही सरकार

एलटीसीजी और एसटीटी में बदलावों के बारे में वित्त मंत्रालय को अलग-अलग पक्षों से कई सुझाव मिले हैं। इन पर अभी विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव का ड्राफ्ट अभी फाइनल नहीं हुआ है

अपडेटेड Nov 06, 2026 पर 4:23 PM
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इक्विटी निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स के लिए होल्डिंग पीरियड बढ़ाने के सुझाव भी सरकार को मिले हैं।

शेयरों के निवेशकों को टैक्स में राहत देने के लिए केंद्र सरकार एक पैकेज पर विचार कर रही है। हालांकि, बजट से पहले इसकी घोषणा होने की संभावना कम है। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय को अलग-अलग पक्षों से कई सुझाव मिले हैं। इन पर अभी विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव का ड्राफ्ट अभी फाइनल नहीं हुआ है।

टैक्स के नियमों में समानता लाने पर फोकस

इस प्रस्ताव के दो बड़े मकसद हैं। पहला, अलग-अलग एसेट क्लास के बीच टैक्स के अंतर को कम करना और दूसरा, शेयर बाजार के भीतर अलग-अलग तरह के निवेशकों पर लगने वाले टैक्स में मौजूदा असमानता को दूर करना। इससे बाजार के सेंटीमेंट पर पॉजिटिव असर पड़ेगा।


प्रमोटर और रिटेल निवेशके लिए अलग-अलग रेट

वित्त मंत्रालय को मिले सुझावों में प्रमोटर और रिटेल निवेशकों के लिए अलग-अलग टैक्स दरें तय करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके अलावा विदेशी प्रमोटरों और विदेशी निवेशकों के लिए भी अलग टैक्स व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया गया है। इसका मकसद शेयरों के अलग-अलग श्रेणी के निवेशकों के टैक्स ट्रीटमेंट को संतुलित बनाना है। हालांकि, सरकार ने अभी इन सुझावों पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

STT की दरों में बदलाव पर भी विचार

शेयर बाजार में लेनदेन पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की मौजूदा दरों में बदलाव का सुझाव भी दिया गया है। इसमें कैश मार्केट, फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में STT की दरों की समीक्षा शामिल है। STT वह टैक्स है जो शेयर बाजार में सिक्योरिटीज की खरीद-बिक्री पर लगता है। इसकी दरों में बदलाव का सीधा असर शेयर बाजार के निवेशकों और ट्रेडर्स की ट्रांजैक्शन कॉस्ट पर पड़ सकता है।

LTCG के लिए होल्डिंग अवधि घट सकती है

इक्विटी निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स के लिए होल्डिंग पीरियड बढ़ाने के सुझाव भी सरकार को मिले हैं। अभी किसी लिस्टेंड कंपनी के शेयर को एक साल बाद बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लागू होता है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने सरकार से 12 महीने की इस अवधि को बढ़ाकर 3 साल यानी 36 महीने करने की मांग की है।

अभी अंतिम फैसला नहीं, वित्त मंत्रालय कर रहा समीक्षा

मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय को इस बारे में जो सुझाव मिले हैं, उनकी समीक्षा की जा रही है। टैक्स राहत पैकेज का स्वरूप क्या होगा और इसमें किन प्रस्तावों को शामिल किया जाएगा, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस संबंध में ईमेल से भेजे गए सवालों का तत्काल जवाब नहीं दिया।

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वित्तमंत्री ने एलटीसीजी पर दिए थे पॉजिटिव संकेत

इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार है। इससे यह संकेत मिला था कि सरकार इस मसले को लेकर गंभीर है। शेयरों से हुए मुनाफे पर लॉन्ग टर्म कैपिटल टैक्स घटाने या होल्डिंग पीरियड बढ़ाने का शेयर बाजारों के सेंटिमेंट पर पॉजिटिव असर पड़ेगा।

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