म्यूचुअल फंड से मोहभंग? इक्विटी स्कीमों में 40% घटा निवेश, जानें क्यों घबरा रहे हैं निवेशक
शेयर बाजार में पिछले कई महीनों से जारी उतार-चढ़ाव और सीमित रिटर्न के बीच इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ी है। जुलाई 2025 के रिकॉर्ड स्तर की तुलना में इक्विटी फंड्स में मंथली निवेश जनवरी में करीब 40% तक घट गया है
जुलाई 2025 में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में 42,702 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड निवेश आया
शेयर बाजार में पिछले कई महीनों से जारी उतार-चढ़ाव और सीमित रिटर्न के बीच इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ी है। जुलाई 2025 के रिकॉर्ड स्तर की तुलना में इक्विटी फंड्स में मंथली निवेश जनवरी में करीब 40% तक घट गया है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स इसे इक्विटी से भरोसा उठने के रूप में नहीं, बल्कि निवेशकों में 'थकान’ के रूप में देख रहे हैं।
जुलाई 2025 में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में 42,702 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड निवेश आया था, जो अब घटकर 24,028 करोड़ रुपये रह गया है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब शेयर बाजार कई महीनों से सीमित दायरे में घूम रहा है और तेज रिटर्न नहीं दे पा रहा है।
बाजार में थकान, लेकिन भरोसा कायम
अबक्कस म्यूचुअल फंड के सीईओ वैभव चुघ का कहना है कि मौजूदा माहौल को देखते इस नरमी की पहले से उम्मीद की जा रही थी। उनके मुताबिक, टैरिफ से जुड़े मुद्दों और ग्लोबल अनिश्चितताओं ने बाजार में अस्थिरता बनाए रखी, जिससे निवेशकों ने थोड़ी सावधानी बरती। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि निवेशकों और डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स ने काफी धैर्य दिखाया है, जो अपने आप में एक पॉजिटिव संकेत है।
व्हाइटओक कैपिटल एएमसी के सीईओ आशीष पी सोमैया का कहना है कि मार्केट साइकल में ऐसे दौर का आना स्वाभाविक हैं। जब लंबे समय तक बाजार सपाट चलता है और खास रिटर्न नहीं देता, तो निवेशकों का बेचैन होना सामान्य है, जिसका असर फंड फ्लो पर भी दिखता है।
बजट और अनिश्चितताओं का असर
आनंद राठी वेल्थ की श्वेता राजानी के अनुसार, कई निवेशक बजट और दूसरी नीतिगत घोषणाओं का इंतजार कर रहे थे। अब जब इनमें से अधिकतर अनिश्चितताएं दूर हो चुकी हैं, तो आगे स्थिरता की उम्मीद की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि इक्विटी न्यू फंड ऑफर (एनएफओ) की संख्या में हाल के महीनों में तेज गिरावट आई है, जिससे निवेश के कुल आंकड़ों पर असर पड़ा।
गोल्ड में बढ़ती दिलचस्पी
इक्विटी फ्लो में नरमी के साथ-साथ सोने में निवेश तेजी से बढ़ा है। जनवरी में गोल्ड ईटीएफ में 24,040 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो जुलाई के 1,256 करोड़ रुपये से कई गुना अधिक है। इस तरह जनवरी 2026 में गोल्ड फ्लो लगभग इक्विटी के बराबर पहुंच गया।
स्क्रिपबॉक्स के मैनेजिंग पार्टनर सचिन जैन का कहना है कि इसे फंडामेंटल बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, कुल पोर्टफोलियो का 5–10 प्रतिशत सोने या कीमती धातुओं में रखना विविधीकरण और महंगाई से बचाव के लिहाज से उचित रणनीति है। उन्होंने आगाह किया कि गोल्ड और सिल्वर में ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तरों पर निवेश के बाद अक्सर लंबी अवधि तक सीमित रिटर्न देखने को मिलते हैं।
मल्टी-एसेट रणनीति की ओर झुकाव
एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड में बढ़ती रुचि दरअसल व्यापक डायवर्सिफिकेशन की रणनीति का हिस्सा है। मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स में बढ़ती दिलचस्पी यह दिखाती है कि निवेशक इक्विटी से बाहर नहीं जा रहे, बल्कि जोखिम संतुलित कर रहे हैं।
SIP का दम कायम
लंपसम निवेश में गिरावट के बावजूद सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश स्थिर बना हुआ है। जुलाई-अगस्त में जहां मंथली SIP निवेश करीब 28,000 करोड़ रुपये था। वहीं दिसंबर और जनवरी में यह 31,000 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया। यह रिटेल निवेशकों की लंबी अवधि की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
सचिन जैन के मुताबिक, 81 लाख करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए 31,000 करोड़ रुपये का मंथली SIP फ्लो एक मजबूत इंजन है। लॉन्ग-टर्म निवेश के लिहाज से इक्विटी का अभी भी कोई सानी नहीं है। ऐसे में आगे भी इक्विटी आवंटन को सहारा दे सकता है।
इक्विटी अब भी पसंदीदा एसेट क्लास
श्वेता राजानी का कहना है कि लंबी अवधि में दो अंकों का रिटर्न पाने के लिए इक्विटी पर फोकस करने वाले पोर्टफोलियो जरूरी है। गोल्ड और सिल्वर का इस्तेमाल मुख्य रूप से डायवर्सिफिकेशन के लिए हो रहा है, न कि इक्विटी के विकल्प के रूप में।
आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ ए बालासुब्रमणियन के अनुसार, हालिया तेजी के चलते गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में मांग बढ़ी है, लेकिन लंबी अवधि में संपत्ति बनाने के लिए इक्विटी अब भी निवेशकों की पहली पसंद बनी हुई है।
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