अब सिर्फ US नहीं! जापान, यूरोप और आस्ट्रेलिया के शेयरों पर आप लगा सकेंगे दांव

Global Access Provider (GAP) भारतीय निवेशकों (Resident) को विदेशी कंपनियों के शेयर खरीदने और बेचने की सुविधा देता है। इसके लिए कई अंतरराष्ट्रीय ब्रोकर्स से समझौते किए गए हैं। इसका मकसद विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश को आसान बनाना है

अपडेटेड Feb 26, 2026 पर 6:53 PM
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ग्लोबल एक्सेस फ्रेमवर्क की एक खास बात यह है कि यह फ्रैक्शनल इनवेस्टमेंट की सुविधा ऑफर करता है।

आप भारत में बैठे जापान, आस्ट्रेलिया और यूरोप के यूरोनेक्स्ट जेसे विदेशी बाजारों में 31 मार्च के बाद से निवेश कर सकेंगे। दरअसल एनएसई इंटरनेशनल एक्सचेंज (एनएसई IX) अपने ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर (जीएपी) का दायरा बढ़ा रहा है। शुरुआती चरण में इसका फोकस अमेरिकी सिक्योरिटीज पर है। इस मामले से जु़ड़े लोगों ने यह जानकारी दी।

कई अंतरराष्ट्रीय ब्रोकर्स से समझौते

Global Access Provider (GAP) भारतीय निवेशकों (Resident) को विदेशी कंपनियों के शेयर खरीदने और बेचने की सुविधा देता है। इसके लिए कई अंतरराष्ट्रीय ब्रोकर्स से समझौते किए गए हैं। इसका मकसद विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश को आसान बनाना है। सुपर ब्रोकर मॉडल से भारतीय निवेशकों को विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश करने में दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।


कई देशों के शेयरों में निवेश करने की सुविधा

एनएसई इंटरनेशनल एक्सचेंज (NSE IX) के एमडी और सीईओ वी सुब्रमण्यम ने एक इंटरव्यू में बताया, "ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर एक सुपर ब्रोकर का प्लेटफॉर्म है। हम जापान के शेयरों का एक्सेस दे सकते हैं। हम यूरोनेक्स्ट का एक्सेस दे सकते हैं। हम इंडियन इनवेस्टर्सको आस्ट्रेलियाई कंपनियों का एक्सेस दे सकते हैं।" उन्होंने इस प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध विदेशी मार्केट्स में निवेश के मौकों के बारे में बताया। यूरोनेक्स्ट एक मल्टी-कंट्री यूरोपियन स्टॉक एक्सचेंज नेटवर्क है, जो कई इक्विटी मार्केट्स का संचालन करता है।

31 मार्च के बाद शुरू हो सकती है निवेश की सुविधा

उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी सेगमेंट को लेकर ऑपरेशनल स्टैबलाइजेशन आ जाने के बाद दूसरे देशों के शेयरों में निवेश की शुरुआत हो सकती है। इस मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि एक्सचेंज का प्लान 31 मार्च के बाद दूसरे विदेशी मार्केट्स में निवेश की सुविधा शुरू कर देने का है।

टी प्लस 1 फ्रेमवर्क का होगा इस्तेमाल

इन मार्केट्स में सेटलमेंट साइकिल के लिए T+1 फ्रेमवर्क का इस्तेमाल होगा। इससे ट्रेड एक दिन बाद ही कंप्लिट हो जाएगा। इससे काउंटरपार्टी और सेटलमेंट रिस्क घटेगा। T+1 सेटलमेंट फ्रेमवर्क में ट्रेड के अगले दिन सेटलमेंट हो जाता है। इससे इनवेस्टर्स को शेयर और फंड का ट्रांसफर जल्द होता है, जिससे सेटलमेंट रिस्क घट जाता है।

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इनवेस्टर्स शेयरों में फ्रैक्शनल इनवेस्टमेंट भी कर सकेंगे

ग्लोबल एक्सेस फ्रेमवर्क की एक खास बात यह है कि यह फ्रैक्शनल इनवेस्टमेंट की सुविधा ऑफर करता है। इससे ज्यादा कीमत वाले विदेशी कंपनियों के शेयर के कुछ हिस्से को रिटेल इनवेस्टर्स खरीद सकेंगे। विकसित देशों के शेयर बाजारों में ऐसी सुविधा पहले से है। बालासुब्रमण्यम ने कहा कि इस विदेशी कंपनियों के शेयरो में निवेश की सुविधा देने वाले फ्रेमवर्क के तहत इनवेस्टर्स उतनी ही आसानी से विदेशी शेयरों में निवेश कर सकेंगे, जितनी आसानी से वे भारतीय कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं।

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