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Experts view : स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर स्थिति साफ़ होने तक मार्केट में सुधार की संभावना नहीं, डॉलर के मुकाबले 100 के लेवल तक टूट सकता है रुपया

Experts view : दिवम शर्मा का मानना ​​है कि जब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति साफ़ नहीं हो जाती,तब तक बाज़ार में कोई टिकाऊ तेज़ी नहीं आ सकती। यह कोई मामूली भू-राजनीतिक घटना नहीं है जिसे बाज़ार नज़रअंदाज़ कर सके

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Mar 31, 2026 पर 11:26 AM
Experts view : स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर स्थिति साफ़ होने तक मार्केट में सुधार की संभावना नहीं, डॉलर के मुकाबले 100 के लेवल तक टूट सकता है रुपया
Expert View:अगर कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर से ऊपर बनी रहती हैं और अप्रैल के मध्य तक मिडिल ईस्ट संकट का कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता,तो डॉलर के मुकाबले रुपया 98–100 का स्तर छू सकता है

Experts view : FIIs ने FY26 में अब तक भारतीय इक्विटी मार्केट में 3.17 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की बकवाली की है। SIP फ़्लो और रिटेल निवेशकों की खरीदारी वजह से घरेलू सेंटीमेंट कुछ समय तक तो ठीक रह सकता है,लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या सचमुच कोई बड़ी और व्यापक तेज़ी आएगी? इसके जवाब में ग्रीन पोर्टफोलियो PMS के को-फाउंडर और फंड मैनेजर दिवम शर्मा ने मनीकंट्रोल से हुई बातचीत में कहा कि होर्मुज़ पर स्थिति साफ़ होना ज़रूरी है। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक कोई भी तेज़ी सिर्फ़ बेयर मार्केट का उछाल होगी,न कि किसी नए दौर की शुरुआत।

दिवम शर्मा का मानना ​​है कि जब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर स्थिति साफ़ नहीं हो जाती,तब तक बाज़ार में कोई टिकाऊ तेज़ी नहीं आ सकती। यह कोई मामूली भू-राजनीतिक घटना नहीं है जिसे बाज़ार नज़रअंदाज़ कर सके।

उन्हें उम्मीद है कि अगले हफ़्ते RBI वित्त वर्ष 2027 के अपने ग्रोथ अनुमानों में काफ़ी कटौती कर सकता है। वित्त वर्ष 2027 के लिए ग्रोथ अनुमान 6.2–6.5 फीसदी के आसपास रह सकता है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि RBI दूसरी तिमाही तक जारी रहने वाले होर्मुज़ जोखिम को कितना महत्व देता है। उन्होंने आगे कहा कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में महंगाई का अनुमान 4.5–5.0 फीसदी के करीब हो सकता है।

बाज़ार की उम्मीदों के मुताबिक ही दिवम शर्मा भी इस बात पर सहमत हैं रेपो रेट कम से कम 2027 के मध्य तक 5.25 प्रतिशत पर ही बना रहेगा। उन्होंने कहा कि जब तक हमें पश्चिम एशिया में तनाव में कोई भारी कमी और कच्चे तेल की कीमतों में कोई बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिलती,तब तक RBI के हाथ बंधे हुए हैं।

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