शेयर बाजारों में गिरावट का सिलसिला जून महीने में भी जारी रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बेंचमार्क इंडेक्स इस महीने 5 फीसदी से अधिक नीचे आए हैं। विदेशी निवेशकों ने इस महीने भी भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकालना जारी रखा, जो गिरावट का मुख्य कारण है। जानकारी के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने जून महीने में शेयर बाजार से रिकॉर्ड 50,203 करोड़ रुपये निकाले हैं।
विदेशी निवेशकों की तरफ से जून में शेयर बाजारों से निकाली गई यह अब तक की सबसे अधिक रकम है। साथ ही यह मार्च 2020 के बाद किसी एक महीने में विदेशी निवेशकों की तरफ से निकाली गई सबसे अधिक रकम है। विदेशी निवेशकों की इस अंधाधुंध बिकवाली के चलते भारतीय शेयर बाजार अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 15 फीसदी नीचे आ गए हैं। भारतीय शेयर बाजारों ने अपना आल-टाइम हाई अक्टूबर 2019 में छुआ था।
विदेशी निवेशकों ने शुरुआत में इसलिए भारतीय शेयर बाजारों से पैसा निकालना शुरू किया क्योंकि उन्हें लगा कि भारतीय बाजार अपने ऑल-टाइम हाई पर है। ऐसे में इसमें थोड़ी गिरावट आ सकती है। इसके बाद उन्होंने ब्याज दरों में बढ़ोतरी और अमेरिकी सेंट्रल बैंक की तरफ से लिक्विडिटी पर लगाम लगाने की आशंका से बिकवाली शुरू की। फिर रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण कर दिया, जिससे ग्लोबल लेवल पर महंगाई सहित कई आर्थिक चुनौतियां शुरू हो गई। इस तरह विदेशी निवेशकों की तरफ से बिकवाली चलती ही जा रही है।
पहली तिमाही में की 1.07 करोड़ की बिकवाली
विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून में करीब 1.07 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है। मई में विदेशी निवेशकों ने 39,993 करोड़ रुपये और अप्रैल में 17,144 करोड़ रुपये इक्विटी मार्केट से निकाले थे। विदेशी निवेशकों ने पिछले कुछ महीनों में किस तरीके से भारतीय बाजार से पैसे निकाले हैं, इसे आप नीचे दिए गए चार्ट में देख सकते हैं-
एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों को अभी कुछ और महीने दर्द सहना पड़ सकता है क्योंकि विदेशी निवेशकों की तरफ से जल्द बिकवाली रुकने वाली नहीं है। ग्रीन पोर्टफोलियो के फाउंडर दिवाम शर्मा ने बताया, "तीसरी तिमाही से हमें विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमने का अनुमान है। ऐसा इसलिए क्योंकि महंगाई अपने पीक पर पहुंचना शुरू हो गई है। फूड प्राइस और मेटल प्राइस में हाल में गिरावट देखी गई है। चीन ने भी अपने यहां इंडस्ट्रीज और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को दोबारा काम शुरू करने की इजाजत दे दी है। ऐसे में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है।"