पेप्सी की बॉटलिंग (Pepsi bottler) करने वाली कंपनी वरुण बेवरेजेज (Varun Beverages)में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का दिल मांगे मोर का दौर लगातार जारी है। विदेशी निवेशकों को पेप्सी नहीं इसको बॉटलों में भरने वाली कंपनी वरुण बेवरेजेज के शेयर चाहिए। मार्च 2020 में इस स्टॉक में विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी 19.82 फीसदी थी जो मार्च 2023 के अंत तक बढ़कर 26 फीसदी पर आ गई। मार्केट कैप के आधार पर टॉप 10 उपभोक्ता कंपनियों के मनीकंट्रोल के विश्लेषण के मुताबिक एफआईआई ने 7 कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ाई है। FIIs ने सबसे ज्यादा खरीदारी वरुण बेवरेजेज, ब्रिटानिया और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में की है।
स्टिंग की बिक्री में बढ़त से वरुण बेवरेजेज को बड़ा फायदा
वरुण बेवरेजेज अपने हाई मार्जिन वाले कारोबार में लगातार विस्तार कर रही है। यही इसके लिए सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट है। इसका उदाहरण है स्टिंग (Sting)। एनर्जी ड्रिंक स्टिंग लोगों को काफी पसंद आ रहा है। ये आकर्षक भाव पर मिल रहा है। कंपनी के प्रोडक्ट मिक्स में स्टिंग की बढ़ती हिस्सेदारी के कारण कंपनी की प्रति केस नेट रियलाइजेशन कैलेंडर ईयर 2023 की पहली तिमाही में174 रुपये पर रहा। इसमें वर्ष-दर-वर्ष (YoY) आधार पर 10 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली थी। कंपनी की हाल में हुई अर्निंग कॉल में चेयरमैन रवि जयपुरिया ने कहा कि स्टिंग कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में जल्द ही दूसरे एनर्जी ड्रिंक्स के साथ मिल कर 15 फीसदी हिस्सेदारी हासिल कर लेगा।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का कहना है कि पिछले तीन सालों में वीबीएल (वरुण बेवरेजेज) के वॉल्यूम में 15 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है। कंपनी को कम पहुंच वाले क्षेत्रों में डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के विस्तार और नए लॉन्च (स्टिंग, दूध आधारित पेय पदार्थ ) से फायदा हुआ है।
ब्रिटानिया में भी FIIs का दिल मांगे मोर
उधर ब्रिटानिया ( Britannia) की बात करें तो गुड-डे बिस्किट बनाने वाली ये कंपनी कोविड महामारी के दौरान अपने मार्जिन का बचाव करने में कामयाब रही थी। यही बात शायद FIIs को सबसे ज्यादा भा गई है। जबकि, इस अवधि में अधिकांश एफएमसीजी कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में कच्चे माल की ऊंची कीमतों के कारण गिरावट आई थी। ब्रिटानिया की मार्जिन पिछले तीन सालों में 16-17 फीसदी पर स्थिर रही है। मॉर्गन स्टेनली ने ब्रिटानिया के 5300 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ 'BUY' रेटिंग दी है।
मॉर्गन स्टेनली का कहना कि ब्रिटानिया के मार्च तिमाही नतीजे अनुमान से बेहतर थे। कंपनी को उच्च मार्जिन का फायदा मिला है। कंपनी प्रबंझन का फोकस अगले 100 वर्षों की कार्ययोजना पर। हालांकि निवेशकों के लिए शॉर्ट टर्म मार्जिन ज्यादा अहम है। फिलिप कैपिटल का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को इस स्टॉक में अच्छा फायदा होगा। क्योंकि आगे फूड सेक्टर संगठित सेक्टर की कंपनियों की पैठ बढ़ेगी जिसका फायदा ब्रिटानिया को मिलेगा।
टाटा कंज्यूमर में एफआईआई हिस्सेदारी बढ़ी
टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में भी पिछले तीन सालों में एफआईआई हिस्सेदारी में उछाल देखने को मिला। मार्च 2020 में कंपनी में एफआईआई हिस्सेदारी 18.15 फीसदी थी जो मार्च 2023 में बढ़कर 25.04 फीसदी पर आ गई। इस अवधि के दौरान इस स्टॉक में 150 फीसदी से ज्यादा की बढ़त हुई।
हालांकि कंपनी का अंतरराष्ट्रीय कॉफी कारोबार महंगाई के दबाव में था। लेकिन इसके भारतीय कारोबार के खाद्य व्यवसाय में मजबूती बरकरार रही। कंपनी के भारतीय कारोबार का मार्जिन करीब 14 फीसदी और अंतर्राष्ट्रीय कारोबार का मार्जिन करीब 11 फीसदी पर है।
हाल ही में कंपनी के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि वे नए कारोबार में अधिग्रहण और विस्तार के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार से कमाई का हिस्सा बढ़ने की उम्मीद के साथ कंपनी के भारती कारोबार का विकास अंतरराष्ट्रीय बाजार को पीछे छोड़ देगा।
जानिए ITC के क्या हैं हाल ?
देश की जानीमानी रिटेल कंपनी ITC में FII की हिस्सेदारी लगभग 14 फीसदी पर स्थिर रही है। हालांकि पिछले तीन वर्षों में स्टॉक की कीमत में 150 फीसदी की तेजी आई। कंपनी सिगरेट, एफएमसीजी और होटल जैसे सभी सेगमेंट में जोरदार प्रदर्शन कर रही है। लेकिन सिगरेट कारोबार की सबसे बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण कंपनी पर लगा 'सिन स्टॉक' का ठप्पा हटना मुश्किल है। वैसे इस समय कंपनी में एफआईआई की हिस्सेदारी ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर है।
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