विदेशी निवेशकों को एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडेटिव डेरिवेटिव (ETCD) मार्केट में ट्रेडिंग की इजाजत मिल गई है। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने इस बारे में 29 जून को स्टेटमेंट जारी किया है। सेबी के बोर्ड ने यह फैसला लिया है। मार्केट रेगुलेटर ने कहा कि एलिजिबल फॉरेन इनटिटी (EFE) रूट को बंद कर दिया गया है। ईएफई रूट के तहत विदेशी निवेशकों का एक्सपोजर इंडियना फिजिकल कमोडिटीज में होना जरूरी था।
नए नियम के मुताबिक, कोई विदेशी निवेशक जो एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव में सौदे करना चाहता है वह इंडियन फिजिकल कमोडिटीज में बगैर किसी एक्सपोजर ऐसा कर सकता है। इसके लिए उसे FPI रूट का इस्तेमाल करना होगा।
सेबी ने कमोडिटी डेरिवेटिव मार्केट की गहराई और लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया है। कमोडिटी डेरिवेटिव मार्के में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी से कमोडिटी की कीमतों के सही निर्धारण (Price Discovery) में मदद मिलेगी।
सेबी ने कहा है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को सभी नॉन-एग्रीकल्चरल कमोडिटी डेरिवेटिव में ट्रेडिंग की इजाजत होगी। उन्हें कुछ एग्रीकल्चरल कमोडिटी डेरिवेटिव में भी ट्रेडिंग की इजाजत होगी। शुरुआत में FPI को सिर्फ कैश-सेटल्ड कॉनट्रैक्ट्स में ट्रेडिंग की इजाजत होगी।
एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव में विदेशी निवेशकों की पॉजिशिन लिमिट के बारे में सेबी ने कहा कि FPI के लिए पॉजिशन लिमिट उतनी ही होगी जितनी अभी बतौर क्लाइंट म्यूचुअल फंड स्कीमों को है।
मार्केट रेगुलेटर ने यह भी कहा कि इंडिविजुअल्स, फैमिली ऑफिसेज, कॉर्पोरेट्स जैसे कैटेगरी से जुड़े FPI को किसी खास कमोडिटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट में क्लाइंट लेवल पॉजिशन के 20 फीसदी तक पॉजिशन लिमिट की इजाजत होगी। यह करेंसी डेरिवेटिव के लिए तय पॉजिशन लिमिट की तरह है।
अभी, कैटेगरी III AIF, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज और म्यूचुअल फंड्स जैसे इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स को इंडियन कमोडिटी डेरिवेटिव मार्केट में ट्रेडिंग की इजाजत है। सेबी ने कहा है कि इस फैसले के लागू होने की तारीख के बारे में बाद में सर्कुलर के जरिए जानकारी दी जाएगी।