इस कैलेंडर ईयर (2022) में मई तक 16 कंपनियों ने IPO से 40,311 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह पिछले साल (2021) की इसी अवधि के मुकाबले 43 फीसदी यानी 17,496 करोड़ रुपये ज्यादा है। PRIME Database से यह जानकारी मिली है।
इस कैलेंडर ईयर (2022) में मई तक 16 कंपनियों ने IPO से 40,311 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह पिछले साल (2021) की इसी अवधि के मुकाबले 43 फीसदी यानी 17,496 करोड़ रुपये ज्यादा है। PRIME Database से यह जानकारी मिली है।
Moneycontrol IPO Tracker और SEBI के डेटा से पता चलता है कि इस साल अब तक 52 कंपनियां IPO पेश करने के लिए सेबी को DRHP भेज चुकी हैं। यह 2007 के बाद सबसे ज्यादा है, जब 121 कंपनियों ने डीआरएचपी फाइल किए थे।
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इस साल आईपीओ से अब तक जुटाई गई कुल रकम में LIC की करीब आधा हिस्सेदारी है। इस साल लिस्ट हो चुकी 31 कंपनियों में से 21 कंपनियों में लिस्टिंग गेंस देखने को मिला। इनमें से 19 कंपनियों के शेयर लॉस में चल रहे हैं। इसकी वजह यह है कि लिस्टिंग के बाद से इन शेयरों की कीमतों में गिरावट आई है।
इस साल की शुरुआत में ज्यादा कंपनियों ने डीआरएचपी फाइल किए। बाद के महीनों में इसमें कमी आई है। इसकी वजह यह है कि मार्केट के मौजूदा माहौल को देखते हुए कंपनियां रिस्क नहीं लेना चाहती। इस महीने शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए थे।
इस साल जनवरी से अप्रैल के दौरान हर महीने 10 डीआरएचपी फाइल किए गए। मई में यह संख्या घटकर 4 रह गई। जून में अब तक 6 डीआरएचपी फाइल किए गए हैं। जून में किसी कंपनी का आईपीओ नहीं आया है। मई में 8 कंपनियों के आईपीओ आए थे। यह इस साल किसी एक महीने में सबसे ज्यादा था।
इस साल सबसे बड़ा आईपीओ LIC ने पेश किया। इस इश्यू को अच्छा रिस्पॉन्स मिला। लेकिन, इसकी लिस्टिंग कमजोरी रही। उसके बाद से इस शेयर में लगातार कमजोरी देखने को मिली है। इश्यू प्राइस से यह शेयर करीब 30 फीसदी गिर चुका है।
LIC के शेयरों के खराब परफॉर्मेंस का असर IPO मार्केट पर पड़ा है। इधर, यूक्रेन क्राइसिस के बाद से बाजार में लगातार गिरावट का माहौल रहा है। इससे इनवेस्टर्स सावधान हो गए हैं। यही वजह है कि इस साल के बाद के महीनों में IPO की संख्या घटी है। जून में तो किसी कंपनी का आईपीओ नहीं आया। आईपीओ पेश करने वाली कंपनियां मार्केट में माहौल बेहतर होने का इंतजार कर रही हैं।
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