FPI लगातार निकाल रहे पैसा, अप्रैल के पहले 10 दिनों में बेचे ₹48213 करोड़ के भारतीय शेयर

FPI's Selling in April: एनालिस्ट्स के अनुसार, लगातार हो रही यह बिकवाली ग्लोबल मैक्रोइकोनॉमिक प्रेशर और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों का परिणाम है। वर्ष 2026 में अब तक भारतीय शेयरों में विदेशी निवेशकों की ओर से कुल बिकवाली बढ़कर 1.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की हो चुकी है

अपडेटेड Apr 12, 2026 पर 12:25 PM
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इससे पहले मार्च में FPI ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ की सेलिंग की थी।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से अप्रैल महीने में भी बिकवाली जारी रखी है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल मैक्रोइकोनॉमिक अनिश्चितता के बीच इन निवेशकों ने अप्रैल के पहले 10 दिन में ही 48,213 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इससे पहले मार्च में FPI ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ की सेलिंग की थी। हालांकि, फरवरी में उन्होंने 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो 17 माह का उच्च स्तर रहा।

NSDL के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक भारतीय शेयरों में विदेशी निवेशकों की ओर से कुल बिकवाली बढ़कर 1.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की हो चुकी है। केवल अप्रैल में ही 10 तारीख तक उन्होंने 48,213 करोड़ रुपये निकाले हैं।

एनालिस्ट्स की राय


एनालिस्ट्स के अनुसार, लगातार हो रही यह बिकवाली ग्लोबल मैक्रोइकोनॉमिक प्रेशर और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों का परिणाम है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया में प्रिंसिपल-मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई को लेकर चिंताएं फिर बढ़ गई हैं। वहीं, जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट से पैदा हुए ऊर्जा संकट, रुपये में कमजोरी और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित असर की वजह से FPI सेलर बने हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजार फिलहाल विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बने हुए हैं। वहां यील्ड की संभावनाएं भारत की तुलना में बेहतर मानी जा रही हैं।

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इन फैक्टर्स पर निर्भर करेगा FPI के रुख में बदलाव

विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव 3 प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगा। इनमें महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट का सामान्य रूप से खुलना, रुपये की स्थिरता और कंपनियों के चौथी तिमाही के बेहतर नतीजे जैसे कारक शामिल हैं। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल होती हैं, तो रुख में तेजी से बदलाव संभव है। हालांकि इस बीच शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशक नेट बायर बन गए। उन्होंने शेयर बाजार में 672 करोड़ रुपये का निवेश किया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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