विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने जनवरी 2023 में भारतीय शेयरों से 28,852 करोड़ रुपये निकाले हैं, जो पिछले सात महीनों में सबसे खराब निकासी थी। यह दिसंबर में 11,119 करोड़ रुपये और नवंबर में 36,238 करोड़ रुपये के शुद्ध निवेश के बाद आया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक FPI फिलहाल भारत में बिकवाली कर रहे हैं और चीन, हांगकांग और दक्षिण कोरिया जैसे सस्ते बाजारों में खरीदारी कर रहे हैं।
अभी और आगे बढ़ सकता FPI का फ्लो
एक्सपर्ट्स के मुताबिक अभी FPI का फ्लो और आगे बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि वैश्विक बाजारों की तुलना में भारतीय शेयर बाजार ने अपने बड़े अंडरपरफॉर्मेंस को जारी रखा है। आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने जनवरी में शेयरों से शुद्ध रूप से 28,852 करोड़ रुपये की निकासी की थी। जून 2022 के बाद से एफपीआई द्वारा यह सबसे बड़ी मासिक निकासी है। जून 2022 में विदेशी पोर्टफोलियों निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 50,203 करोड़ रुपये की निकासी की थी। जनवरी में आउटफ्लो के बाद फरवरी के पहले सप्ताह में इक्विटी से 5,700 करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध निकासी हुई है।
इंडियन शेयर मार्केट में आई है गिरावट
एक्सपर्ट्स के मुताबिक दूसरे सस्ते बाजारों की वजह से इस साल अब तक भारतीय बाजार का प्रदर्शन काफी खराब रहा है। जहां चीन, हांगकांग और दक्षिण कोरिया में इस साल अब तक क्रमशः 4.71 प्रतिशत, 7.52 प्रतिशत और 11.45 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि भारत में 1.89 प्रतिशत की गिरावट आई है। केंद्रीय बजट और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले एफपीआई ने भारतीय बाजारों के प्रति सतर्क रुख अपनाया था। वहीं दूसी तरफ विदेशी पोर्टफोलियों निवेशकों ने डेट मार्केट में 3,531 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
2022 में FPI ने की थी 1.21 लाख करोड़ की निकासी
इससे पहले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने दिसंबर के महीने में भारतीय शेयरों में 11,119 करोड़ रुपये और नवंबर में 36,239 करोड़ रुपये डाले थे। कुल मिलाकर एफपीआई ने साल 2022 में भारतीय शेयर बाजारों से 1.21 लाख करोड़ रुपये निकाले थे। वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों, खास तौर पर फेडर रिजर्व द्वारा ब्याज की दरों में आक्रामक वृद्धि, कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव, कमोडिटी के ऊंचे दाम और रूस यूक्रेन युद्ध की वजह से पिछले सालविदेशी पोर्टफोलियो निवेशक बिकवाल बने रहे थे।