Gold Silver ETFs surge : ईरान पर US-इज़राइल के हमलों के बाद, निवेशकों के सेफ़-हेवन एसेट्स की ओर रुख किया है। इसके चलते 2 मार्च को सोने और चांदी के एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में तेज़ी देखने को मिल रही है। अमेरिका के हमले ने पश्चिम एशिया को एक बड़े संघर्ष में धकेल दिया है। एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि अगले कुल सेशन में बाजार में उतार-चढ़ाव रहेगा। जियोपॉलिटिकल रिस्क बढ़ने से कीमती मेटल्स में नया निवेश बढ़ रहा है, जबकि ग्लोबल इक्विटीज़ पर दबाव पड़ सकता है।
आज सुबह करीब 11 बजे, जबकि इक्विटी बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1.4 फीसदी नीचे थे। जबकि, सिल्वर-लिंक्ड ETFs 9 फीसदी तक ऊपर ट्रेड कर रहे थे। एंजल वन सिल्वर ETF करीब 9 फीसदी तेजी में था, टाटा सिल्वर ETF, ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ETF और एक्सिस सिल्वर ETF भी 6 फीसदी की तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे। SBI और HDFC ETFs 5 से 6 फीसदी ऊपर ट्रेड कर रहे थे।
सोने की बात करें तो, ज़्यादातर गोल्ड ETF पिछले बंद भाव से 3-4 फीसदी ऊपर ट्रेड कर रहे थे।
ETF में उछाल को बुलियन की कीमतों में बढ़त से ट्रैक किया जा सकता है। MCX गोल्ड फ्यूचर्स 2.91 फीसदी बढ़कर 1,66,816 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। चांदी भी 2.61 परसेंट बढ़कर 2,90,188 रुपये प्रति kg पर पहुंच गई।
स्टॉकिफाई के फाउंडर और CEO, पीयूष झुनझुनवाला का कहना है कि जो इन्वेस्टर अपना पैसा इन्वेस्ट करते हैं वे ग्लोबल घटनाओं से जुड़े जोखिम को भी ध्यान में रखते है। जियोपोलिटिकल जोखिम बढ़ने की वजह से निवेशक सोने और चांदी के ETF की तरफ रुख कर रहे हैं। जो इन्वेस्टर युद्ध जैसे हालात में अपने पैसे को बचाना चाहते हैं, वे अपना पैसा स्टॉक मार्केट से निकालकर सुरक्षित एसेट्स में लगाएंगे। इससे बुलियन आधारित ETF में इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा।
सोने में क्यों बढ़ रहा निवेशकों का रुझान
सोना तीन तरह के जोखिमों के खिलाफ एक बड़ा हेज का काम करता है। इन जोखिमों में अनिश्चित हालात, करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव और महंगाई की चिंता जैसे जोखिम शामिल है। फोर्टुना एसेट मैनेजर्स के पार्टनर जयंत मांगलिक का कहना है कि मौजूदा जियोपॉलिटिकल तनाव ने एक बार फिर इन्वेस्टर पोर्टफोलियो में एक स्ट्रेटेजिक हेज के तौर पर सोने की अहमियत को मज़बूत किया है। गोल्ड ETF में दिलचस्पी बढ़ती दिख रही है। इन्वेस्टर फिजिकल स्टोरेज की चुनौतियों के बिना लिक्विडिटी, ट्रांसपेरेंसी और एलोकेशन में आसानी को ध्यान में रखते हुए ETF में निवेश कर रहे हैं।
अब क्या हो निवेशकों की रणनीति
मांगलिक ने कहा कि गोल्ड और सिल्वर ETF में थोड़ा-बहुत निवेश करने से जियोपॉलिटिकल झटकों, करेंसी में उतार-चढ़ाव और महंगाई के जोखिमों से पोर्टफोलियो को सुरक्षित करने में मदद मिल सकती है। झुनझुनवाला ने कहा कि हम इन्वेस्टर्स को मोमेंटम-ड्रिवन रैली का पीछा करने के बजाय डाइवर्सिफिकेशन और रिस्क हेजिंग के लिए स्ट्रेटेजिक रूप से गोल्ड और सिल्वर ETF का इस्तेमाल करने का सुझाव देते हैं।
अगनाम एडवाइजर्स के फाउंडर-CEO प्रशांत मिश्रा ने कहा कि इन्वेस्टर्स को ग्लोबल हेडलाइंस पर इमोशनल होकर रिएक्ट करने से बचना चाहिए।
इन्वेस्टर्स के लिए यह समय सट्टेबाजी करने के बजाय अनुशासित तरीके से एसेट एलोकेशन करने का है। जो इन्वेस्टर युद्ध जैसे हालात में अपने कैपिटल को बचाना चाहते हैं, वे अपना पैसा स्टॉक्स से निकालकर सुरक्षित एसेट्स में लगाएं।
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