Google ने अब सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा, ₹1,338 करोड़ के जुर्माने वाले आदेश को दी चुनौती

दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) के आदेश के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। NCLAT ने गूगल पर लगाए 1,338 करोड़ रुपये के जुर्माने को बरकरार रखने का फैसला सुनाया था। गूगल पर यह जुर्माना कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने लगाया है

अपडेटेड Jun 26, 2023 पर 10:57 PM
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CCI ने 20 अक्टूबर 2022 को गूगल पर 1338 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया

दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) के आदेश के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। NCLAT ने गूगल पर लगाए 1,338 करोड़ रुपये के जुर्माने को बरकरार रखने का फैसला सुनाया था। गूगल पर यह जुर्माना कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने लगाया है। गूगल की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, "आज हमने एंड्रॉइड मामले में NCLAT के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक अपील दायर की है। NCLAT ने यह सही पाया कि कॉम्पिटीशन-विरोधी व्यवहार से नुकसानर को अभी साबित करने की जरूरत है। लेकिन इस शर्त को उसने CCI की ओर से जारी निर्देशों पर लागू नहीं किया और जुर्माने को बरकरार रखा।"

गूगल ने आगे कहा, "हम सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना मामला पेश करने करने के लिए उत्सुक हैं कि कैसे एंड्रॉइड ने भारतीय यूजर्स, डेवलपर्स और OEMs को लाभ पहुंचाया है। साथ ही भारत में डिजिटल परिवर्तन को रफ्तार दी है।"

CCI ने एंड्रॉयड में दबदबे के गलत इस्तेमाल के आरोप में गूगल पर 1,338 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया है। गूगल ने इस फैसले को NCLAT में चुनौती दी थी। हालांकि NCLAT ने मार्च 2023 में आंशिक रूप से सीसीआई के आदेश को बरकरार रखा।


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अपीलेट ट्राइब्यूनल ने माना कि CCI का आदेश किसी भी पूर्वाग्रह से ग्रस्त नहीं है। इसके अलावा, NCLAT ने माना कि Google की ओर से मोबाइल कंपनियों को अपने डिवाइस में गूगल के 11 एप्लिकेशन वाले पूरे पैकेज को पहले से इंस्टॉल करने के लिए कहना अनुचित शर्तों को थोपना है।

ट्रिब्यूनल ने यह माना है कि गूगल वास्तव में कंपनियों को अपना खुद का एंड्रॉयड वर्जन (Android Forks) डेवलप करने से रोकती है और इसके लिए वह एंटी फ्रैग्मेंटेशन एग्रीमेंट (AFA) का इस्तेमाल करती है।

हालांकि ट्रिब्यूनल ने Google के पक्ष में भी कुछ निर्देश दिए।NCLAT ने सीसीआई के चार आदेश को रद्द कर दिया है। जब यूजर्स सीधे वेबसाइट से या किसी अज्ञात स्रोत से ऐप डाउनलोड यानी साइडलोडिंग करते हैं तो उन्हें चेतावनी भेजने में गूगल ने पक्षपात नहीं किया। गूगल को अपना स्वामित्व ऐप प्रोग्राम इंटरफेस (API) थर्ड पार्टी के साथ साझा करने की जरूरत नहीं है।

वायरस से बचने के लिए गूगल ने अपने प्ले स्टोर पर थर्ड पार्टी ऐप स्टोर्स की अनुमति नहीं दी, ट्रिब्यूनल के मुताबिक गूगल ने यह सही किया है। इसके अलावा ट्रिब्यूनल इस बात पर सहमत दिखी कि एंड्रॉयड फोन पर गूगल अपने सुइट ऐप्स को अनइंस्टॉल करने से रोक सकता है।

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