Green Energy Stocks: क्या ग्रीन एनर्जी से जुड़े शेयरों में निवेश का नया मौका बन रहा है? ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि गुजरात में इस समय 'ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी इनवेस्टर्स मीट एंड एक्स्पो' कार्यक्रम चल रहा है। खुद पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम का उद्दघाटन किया है और सरकार ने इस कार्यक्रम में ग्रीन एनर्जी सेगमेंट को लेकर कई बड़े ऐलान किए हैं। अब जब सरकार खुद इस सेक्टर को इतना प्रमोट कर रही है, तो हमें भी इस पर एक नजर डाल लेने चाहिए
ग्रीन एनर्जी कंपनियों के शेयरों ने इस साल औसतन 80% का रिटर्न दिया है। यह अपने आप में काफी बड़ी बात है। सबसे अधिक रिटर्न देने वाले टॉप-3 शेयरों में वॉरी रिन्यूएबल्स, सुजलॉन एनर्जी और आईनॉक्स विंड शामिल हैं। अगर हम इंडेक्स की बात करें, तो BSE Power Index में इस साल 44% की तेजी आई है, जबकि सेंसेक्स और निफ्टी इस दौरान सिर्फ करीब 16 पर्सेंट ही बढ़े हैं। जो साफ बताता है कि इस समय ग्रीन एनर्जी सेक्टर बाकी मार्केट से कहीं आगे है।
गुजरात में चल रही मीटिंग में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने बताया कि सरकार ने 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसके लिए बैंकों और वित्तीय संस्थाओं से अब तक 32.45 लाख करोड़ रुपये के निवेश का वादा आ चुका है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्रीन एनर्जी में खासकर सोलर पैनल और सोलर मॉड्यूल बनाने वाली कंपनियों की डिमांड काफी बढ़ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह है भारत का 2070 तक कार्बन न्यूट्रल बनने का लक्ष्य। इसके चलते रिन्यूएबल एनर्जी का भविष्य उज्जवल दिख रहा है।
मिराए एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सीनियर फंड मैनेजर अंकित जैन का कहना है कि दुनिया भर में सस्टेनेबल एनर्जी सॉल्यूशंस की ओर रुझान बढ़ रहा है, जिसके चलते इस सेक्टर में निवेश आया है। साथ ही, सरकार की नीतियों और रिन्यूएबल एनर्जी के घटती लागत से भी यह सेक्टर लगातार आकर्षक बनता जा रहा है। कई निवेशक ग्रीन एनर्जी कंपनियों में इसलिए भी रुचि ले रहे हैं क्योंकि इन कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ लंबे समय तक टिकाऊ रहती है। पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPAs) से इनकी आमदनी सुनिश्चित रहती है।
एलारा कैपिटल के रुपेश संखे कहते हैं कि हर साल इस सेक्टर में काफी टेंडर आते हैं, जिसका सीधा फायदा मजबूत वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों को होता है। यही वजह है कि मिड-कैप कंपनियां भी ग्रीन एनर्जी सेक्टर में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं, भले ही उनके स्टॉक मल्टीपल्स बहुत ज्यादा हों।
लेकिन यहां एक सावधानी की भी जरूरत है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी कई स्टॉक्स बहुत ऊंचे वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में निवेश के लिए थोड़ा इंतजार करना चाहिए।
पैटर्सन PMS के पोर्टफोलियो मैनेजर, प्रसन्ना बिडकर का कहना है कि इस सेक्टर की ग्रोथ की स्थिरता को लेकर भी कुछ चिंताएं हैं। पिछले कुछ सालों में रिन्यूएबल कैपेसिटी 30 गुना बढ़ी है, लेकिन अब बेस बड़ा हो गया है, तो आगे की ग्रोथ थोड़ी धीमी हो सकती है।
इसके अलावा तकनीकी बदलाव भी इस सेक्टर को प्रभावित कर रहे हैं। सोलर पैनल और अन्य उपकरणों की लागत घट रही है, जिससे कुछ कंपनियां दिवालिया हो गई हैं। प्रसन्ना का कहना है कि, "हर कोई उम्मीद कर रहा था कि रूफटॉप सोलर की डिमांड बढ़ेगी, लेकिन कई राज्यों में लोग पहले से ही बिजली बिलों पर न्यूनतम या जीरो रुपये भुगतान कर रहे हैं, इसलिए वह डिमांड नहीं दिख रही।"
हालांकि बाकी एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस सेक्टर में अभी काफी ग्रोथ की संभावनाओं हैं और निवेशकों को बस थोड़ी सावधानी के साथ निवेश करना चाहिए। फिलहाल इस सेक्टर में कौन-कौन सी कंपनियं मजबूत हैं, यह पूछे जाने पर Fisdom के रिसर्च हेड, नीरव करकेरा ने कहा कि अदाणी ग्रीन, एनटीपीसी, टाटा पावार और वॉरी रिन्यूएबल्स का शेयर इन्हें पसंद है। करकेरा ने कहा कि उनके मुताबिक Tata Power और NTPC बेहतर दांव हो सकते हैं, क्योंकि इनका मूल्यांकन संतुलित है और इनकी मौजूदगी पारंपरिक और रिन्युएबल दोनों पावर सेक्टर्स में है।
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