गुजरात गैस के शेयरों में 17 अप्रैल को पंख लग गए। इसकी वजह विदेशी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा की कंपनी के बारे में राय है। नोमुरा ने गुजरात गैस के शेयरों में निवेश की सलाह दी है। पहले उसने इस शेयर में निवेश घटाने की सलाह दी थी। अब उसने अपनी सलाह बदल दी है। उसका मानना है कि प्रमुख औद्योगिक सेगमेंट में डिमांड में इम्प्रूवमेंट दिख रहा है। इसका फायदा गुजरात गैस को मिलेगा।
नोमुरा ने दिया 390 रुपये का टारगेट प्राइस
Gujarat Gas का शेयर 17 अप्रैल को 8.58 फीसदी चढ़कर 364.30 रुपये पर बंद हुआ। नोमुरा ने इस शेयर के लिए 390 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि शेयर में करीब 15 फीसदी उछाल आ सकता है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि गुजरात की मोबरी सिरेमिक इंडस्ट्री की तरफ से मांग बढ़ सकती है। इंडस्ट्री प्रोपेन की जगह नेचुरल गैस का इस्तेमाल कर रही है। इससे वॉल्यूम में इजाफा हो सकता है।
एलपीजी की सप्लाई सामान्य होने में 3-4 साल लग सकते हैं
सिरेमिक इंडस्ट्री को फ्यूल की कम सप्लाई की वजह से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह यह है कि सरकार ने एलपीजी की सप्लाई के मामले में परिवारों को प्रायरिटी देने का फैसला लिया है। इससे प्रोपेन की सप्लाई घटी है। नोमुरा ने मनीकंट्रोल की खबर के हवाले से बताया है कि एलपीजी की ग्लोबल सप्लाई सामान्य होने में 3 से 4 साल का समय लग सकता है।
सिरेमिक मैन्युफैक्चरर्स गुजरात गैस से बातचीत कर रहे
मोरबी में करीब 78 फीसदी सिरेमिक मैन्युफैक्चरर्स प्रोपेन पर निर्भर हैं। इनमें से कई मैन्युफैक्चरर्स अब नेचुरल गैस का इस्तेमाल करने के लिए गुजरात गैस से बातचीत कर रहे हैं। नोमुरा का मानना है कि इससे गुजरात गैस की ग्रोथ की संभावना काफी बढ़ सकती है। ब्रोकरेज फर्म ने यह भी बताया है कि मोरबी स्थित मैन्युफैक्चरर्स महंगे फ्यूल कॉस्ट की वजह से कीमतें 15-25 फीसदी बढ़ाने के बारे में सोच रहे है। इससे गुजरात गैस का मार्जिन बढ़ेगा।
बीते एक साल में 18 फीसदी गिरा है शेयर
नोमुरा ने स्पॉट एलएनजी की कीमतों में उछाल को देखते हुए गुजरात गैस के FY27 के EBITDA के अपने अनुमान को 8 फीसदी घटा दिया है। लेकिन, उसने FY28 के EBITDA के अपने अनुमान को 14 फीसदी तक बढ़ा दिया है। इसकी वजह स्ट्रॉन्ग इंडस्ट्रियल मार्जिन और वॉल्यूम ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि, बीते एक साल में गुजरात गैस के शेयर में करीब 18 फीसदी गिरावट आई है। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 25,000 करोड़ से नीचे आ गया है।