संकट में गुजरात का हीरा कारोबार, साल भर में 63 हीरा कारीगर कर चुके हैं ख़ुदकुशी

डायमंड एक्सपर्ट जीतूभाई मोरडिया का कहना है कि 2008 में रत्न कलाकार बोर्ड बना था, रत्नसिंह योजना भी थी जिससे डायमंड वर्कर काफ़ी ख़ुश थे। इस मुश्किल के माहौल में अब सरकार ही कोई रास्ता निकाल सकती है। डायमंड इंडस्ट्री से सरकारों को सालाना करोड़ों का राजस्व मिलता है। लेकिन आज इंडस्ट्री की हालत पतली है

अपडेटेड Apr 01, 2025 पर 6:50 PM
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गुजरात में 40 फीसदी हीरा कारखाने बंद हो गए हैं। अकेले गुजरात में 24 लाख कारीगर और 20,000 कारखाने हैं। देश भर में कुल 30 लाख से ज्यादा हीरा कारीगर हैं। 3 साल में गुजरात में 30-40 फीसदी हीरा कारखाने बंद हो गए हैं

पिछले तीन साल से डायमंड इंडस्ट्री अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है। गुजरात के लाखो हीरा कारीगरो का रोजगार खत्म होने का खतरा है। क्यों हुई ऐसी परिस्थिति और क्या है इससे निकलने का रास्ता? यह एक बड़ा सवाल बन गया है। सूरत में सालों बाद हीरा कारीगरों ने दो दिन की हड़ताल की है। लंबे समय से युद्ध के हालात ने डायमंड की खपत रोक रखी है । अमेरिका और यूरोप दुनिया के सब से बड़े डायमंड खरीदार हैं लेकिन वहां भी मंदी का माहौल है। ऐसे में दुनिया के सबसे बड़े रफ डायमंड के पॉलिश के केंद्र गुजरात में काम ठप है।मजदूरों के यूनियन ने दावा किया है की साल भर में 63 हीरा कारीगर ख़ुदकुशी कर चुके हैं। डायमंड वर्कर के काम के घंटे और वेतन में भारी गिरावट आ गई है।

सूरत डायमंड वर्क्स यूनियन के उप प्रमुख भावेश टाक का कहना है कि हीरा कारखानेदारों कारीगरों के वेतन में बढ़त करनी चाहिए। सरकार को भी हीरा कारोबारियों के लिए योजनाएं लानी चाहिए।

हीरा कारोबार पर आए संकट का आलम यह है कि गुजरात में 40 फीसदी हीरा कारखाने बंद हो गए हैं। अकेले गुजरात में 24 लाख कारीगर और 20,000 कारखाने हैं। देश भर में कुल 30 लाख से ज्यादा हीरा कारीगर हैं। 3 साल में गुजरात में 30-40 फीसदी हीरा कारखाने बंद हो गए हैं। हीरा कारीगरों के काम में 30 फीसदी और वेतन में 20 फीसदी की कटौती हुई है। जानकार के मुताबिक़ ऐसे माहौल में सरकार ही रास्ता निकल सकती है।


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डायमंड एक्सपर्ट जीतूभाई मोरडिया का कहना है कि 2008 में रत्न कलाकार बोर्ड बना था, रत्नसिंह योजना भी थी जिससे डायमंड वर्कर काफ़ी ख़ुश थे। इस मुश्किल के माहौल में अब सरकार ही कोई रास्ता निकाल सकती है। डायमंड इंडस्ट्री से सरकारों को सालाना करोड़ों का राजस्व मिलता है। लेकिन आज इंडस्ट्री की हालत पतली है और इंडस्ट्री सरकार से राहत की मांग कर रही है।

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