HDFC Bank की फिर से करनी होगी रेटिंग, इन प्वाइंट्स पर रहेगी एक्सपर्ट्स की नजर

एचडीएफसी (HDFC) के विलय के चलते एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) की बुक वैल्यू को झटका लगा है। इसके चलते ब्रोकरेजेज ने इसकी रेटिंग में कटौती की है और टारगेट प्राइस भी घटा दिया है। हालांकि घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के नितिन अग्रवाल का कहना है कि अगले एक से डेढ़ साल में इसे फिर से रेट किया जाएगा। जानिए मार्केट एक्सपर्ट्स की नजरें किन बातों पर रहेगी

अपडेटेड Sep 22, 2023 पर 11:43 AM
18 सितंबर को विदेशी ब्रोकिंग फर्म नोमुरा ने एचडीएफसी बैंक की रेटिंग को डाउनग्रेड कर न्यूट्रल कर दिया।

एचडीएफसी (HDFC) के विलय के चलते एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) की बुक वैल्यू को झटका लगा है। इसके चलते ब्रोकरेजेज ने इसकी रेटिंग में कटौती की है और टारगेट प्राइस भी घटा दिया है। हालांकि घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के नितिन अग्रवाल का कहना है कि अगले एक से डेढ़ साल में इसे फिर से रेट किया जाएगा। नितिन के मुताबिक लॉन्ग टर्म के लिए इस शेयर को लेकर सवाल नहीं उठा सकते हैं क्योंकि विलय के बाद वित्त वर्ष 2026 तक यह 2 फीसदी के रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) को हासिल कर लेगा। उनका कहना है कि विलय के बाद बनी कंपनी की कमाई में धीरे-धीरे सुधार होगा।

आने वाली तिमाहियों में इसके लिक्विडिटी पर नजर रखनी होगी और इससे कारोबार को बढ़ने में मदद मिल सकती है। नितिन के मुताबिक बुक वैल्यू के हिसाब से अभी यह 2.6 गुने भाव पर है जो आकर्षक लेवल पर बना हुआ है। हालांकि विलय के चलते यह बहुत बड़ी कंपनी हो चुकी है तो आगे इसका कारोबार कैसा रहेगा, यह देखना काफी महत्वपूर्ण होगा।

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किन बातों पर रहेगी नजर

मोतीलाल ओसवाल के नितिन के मुताबिक सबसे अहम तो डिपॉजिट ग्रोथ को देखना होगा। उनका कहना है कि मार्केट में कॉम्पटीशन का माहौल बना रहेगा लेकिन बैंक के डिपॉजिट्स और एडवांसेज पर नजर रहेगी ताकि विलय के बाद बनी कंपनी की ग्रोथ का सही से आकलन किया जा सके। इसके अलाना मार्जिन पर भी नजर रहेगी। अगली एक तिमाही की बात करें तो नितिन अग्रवाल इंतजार का सुझाव दे रहे हैं और उनका मानना है कि यह देखना बाकी है कि विलय के बाद जो लिक्विडिटी बढ़ी है, उसका बैंक कैसे इस्तेमाल करता है।

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Nomura ने इस कारण गिरा दी HDFC Bank की रेटिंग

18 सितंबर को विदेशी ब्रकिंग फर्म नोमुरा ने HDFC Bank की रेटिंग को डाउनग्रेड कर न्यूट्रल कर दिया है। ब्रोकरेज के मुताबिक IGAAP (इंडियन जनरली एस्सेप्टेड अकाउंटिंग प्रिंसिपल्स) अकाउंटिंग और प्रोविजनिंग के मिलान के चलते HDFC की नेटवर्थ में गिरावट के एडजस्ट की वजह से विलय के बाद बनी कंपनी के लिए बुक वैल्यू प्रति शेयर 23 रुपये कम की गई है। इसके अलावा ब्रोकरेज का यह भी मानना है कि अगली दो से तीन तिमाहियों में नेट इंटेरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव दिख सकता है क्योंकि HDFC का पहली तिमाही में NIM 2.7 फीसदी पर था और इस तिमाही में ओपनिंग 2 फीसदी पर आ गया। इसकी वजह ये है कि विलय के बाद लिक्विडिटी काफी अधिक हो गई है।

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