Hindenburg-Adani Case: हिंडनबर्ग और अदाणी ग्रुप से जुड़े मामले में सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच का नाम आने पर सरकार ने अपना पक्ष रखा है। डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक अफेयर्स (DEA) सेक्रेटरी अजय सेठ ने कहा कि सेबी ने इस मामले में पहले ही अपना बयान जारी कर दिया है। इसके अलावा सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच ने भी अपना पक्ष पेश कर दिया है। ऐसे में अजय सेठ ने कहा कि सरकार को इस मामले में और कुछ कहने की जरूरत नहीं है। इस मामले में बाजार के कई दिग्गजों के साथ-साथ म्यूचुअल फंड बॉडी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) ने भी अपना बयान जारी किया है।
क्या कहा SEBI और सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच ने?
सेबी का कहना है कि अदाणी ग्रुप के खिलाफ हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में जो भी आरोप लगाए गए थे, उनकी गहराई से जांच की गई है। 3 जनवरी 2024 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सेबी ने 2024 की शुरुआत तक अदाणी ग्रुप से जुड़ी 24 में से 22 जांच जांच पूरी कर ली थी। वहीं सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच की बात करें तो हिंडनबर्ग रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच और उनके पति की उन ऑफशोर एंटिटीज में हिस्सेदारी थी जिसके जरिए अदाणी ग्रुप की कंपनियों में हेराफेरी की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक यह निवेश वर्ष 2015 में हुआ था यानी कि 2017 में माधबी के सेबी के पूर्णकालिक सदस्य बनने और वर्ष 2022 में चेयरपर्सन बनने से पहले। हिंडनबर्ग के आरोपों पर सेबी चेयरपर्सन और उनके पति धवल ने संयुक्त रूप से बयान जारी किया है कि उनका जीवन और वित्तीय लेन-देन एक खुली किताब की तरह है। उन्होंने हिंडनबर्ग के सभी आरोपों का खंडन किया।
म्यूचुअल फंड बॉडी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) ने सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच का समर्थन किया है और कहा कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट मार्केट में भरोसे को कम करने की कोशिश में है। एएमएफआई ने कहा कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट देश के कैपिटल मार्केट में माधबी बुच के योगदान को कम करने के प्रयास का हिस्सा है औऱ यह मार्केट में भरोसे को कम करके इकनॉमिक ग्रोथ को नुकसान पहुंचा सकती है। एएमएफआई ने देशी-विदेशी निवेशकों को आश्वस्त किया है कि भारतीय फाइनेंशियल सिस्टम सुरक्षित. पारदर्शी और आगे बढ़ने वाली है।