bank stocks : स्टॉक मार्केट में वॉलेटिलिटी यानी उतार-चढ़ाव का स्वागत किया जाता है, क्योंकि इससे आपको अच्छे रिटर्न हासिल करने का मौका मिलता है। लेकिन वॉलेटिलिटी से यह भी संकेत मिलते हैं कि दलाल स्ट्रीट एक सेक्टर को अनिश्चय की स्थिति में है।

bank stocks : स्टॉक मार्केट में वॉलेटिलिटी यानी उतार-चढ़ाव का स्वागत किया जाता है, क्योंकि इससे आपको अच्छे रिटर्न हासिल करने का मौका मिलता है। लेकिन वॉलेटिलिटी से यह भी संकेत मिलते हैं कि दलाल स्ट्रीट एक सेक्टर को अनिश्चय की स्थिति में है।
भारत के बैंकिंग स्टॉक्स के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। बीते छह महीने में बैंक निफ्टी इंडेक्स में वॉलेटिलिटी ने निफ्टी 50 को पीछे छोड़ दिया है। आईफास्ट फाइनेंसियल इंडिया की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट रचना मखीजा से मिले डाटा के मुताबिक, पिछले छह महीनों में निफ्टी 50 की तुलना में बैंक निफ्टी इंडेक्स के एवरेज डेली रिटर्न में 1.1 फीसदी का डेविएशन रहा है। वहीं निफ्टी 50 ने 0.81 फीसदी का डेविएशन दिखाया है।
प्राइवेट बैंक एक दायरे में बने हुए हैं
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के हेड रिटेल रिसर्च दीपक जैसानी ने कहा, “बैंक निफ्टी में कम संख्या में प्रतिभागियों और बैंकिंग स्टॉक्स के ज्यादा हाई बीटा नेचर के कारण यह निफ्टी की तुलना में ज्यादा वॉलेटाइल रहा है।” उन्होंने कहा, बैंकों में प्राइवेट बैंक एक दायरे में हैं, जबकि पीएसयू बैंक असेट क्वालिटी में सुधार और प्राइवेटाइजेशन की उम्मीद में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
डेली वॉलेटिलिटी हुई है कम
जैसानी ने कहा, निफ्टी बैंक इंडेक्स में डेली वॉलेटिलिटी 2.28 फीसदी (जनवरी) से घटकर 1.67 फीसदी (जुलाई-दिसंबर, 2021) रह गई है। बैंक स्टॉक्स का नेचर साइक्लिकल होता है और दूसरे सेक्टर और ब्रॉड इकोनॉमी की तुलना में प्रदर्शन सबसे अच्छा रहता है। यही वजह है कि उनमें उतार-चढ़ाव ज्यादा रहता है।
बैंकिंग सेक्टर ने असेट क्वालिटी से जुड़ी चिंताओं और क्रेडिट ग्रोथ में कमी के चलते पिछले छह महीने में बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में कमजोर प्रदर्शन किया है, जिससे फॉरेन इनवेस्टर्स ने इसमें खासी बिकवाली की है।
आरबीआई रिपोर्ट
रिजर्व बैंक की हालिया फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि लेंडर्स को अभी भी असेट क्वालिटी के इश्यूज से बाहर निकलना बाकी है। रिपोर्ट में बैड लोन्स बढ़ने की उम्मीद जताई गई है, जिससे बैंकों की अर्निंग्स पर मार पड़ेगी। बैंक स्टॉक्स में वॉलेटिलिटी की एक अन्य वजह भारत के सबसे वैल्युएबल बैंक एचडीएफसी बैंक जैसे हैवीवेट स्टॉक्स से जुड़ी चिंता है, जिसने लगातार दूसरे साल मार्केट की तुलना में कमजोर प्रदर्शन किया है।
एचडीएफसी बैंक पर वित्त वर्ष 21 में आठ महीनों तक क्रेडिट कार्ड जारी करने पर प्रतिबंध लगा रहा। हालांकि, प्रतिबंध हटने और अच्छी लोन ग्रोथ दिखने से स्टॉक को आगे फायदा मिल सकता है।
निफ्टी बैंक का प्रदर्शन रहा है कमजोर
पिछले छह महीने में निफ्टी बैंक इंडेक्स में 7.05 फीसदी की मजबूती दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 50 और निफ्टी फाइनेंसियल में क्रमशः 13.20 फीसदी और 10.39 फीसदी की मजबूती दर्ज की गई।
जिओजित फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा, “बैंक शॉर्ट टर्म में कमजोर प्रदर्शन कर सकते हैं, क्योंकि वे अभी भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। हालांकि, हम इस साल के दौरान बैंकों के फाइनेंसियल्स में सुधार की उम्मीद करते हैं। हमारा सेक्टर को लेकर पॉजिटिव लॉन्ग टर्म आउटलुक है और उचित वैल्युएशन, मजबूत बैलेंसशीट, क्रेडिट ग्रोथ और इकोनॉमिक ग्रोथ में सुधार को देखते हुए टॉप प्राइवेट बैंकों में पोजिशन लेने की सिफारिश करते हैं।”
हिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।