BPCL : भारत सरकार भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Bharat Petroleum Corp Ltd) के लिए खरीदारों को लुभाने में नाकाम रहने के बाद अब इसकी 25 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है। सरकार अपने डिसइनवेस्टमेंट प्रोग्राम (divestment programme) की उम्मीद से ज्यादा सुस्त प्रगति को देखते हुए अब यह योजना बना रही है। रॉयटर्स ने दो अधिकारियों के हवाले से यह खबर दी है।
अब 25 फीसदी तक हिस्सेदारी बेच सकती है सरकार
दोनों अधिकारियों ने बताया कि सरकार अब BPCL में 20-25% हिस्सेदारी के लिए बिड्स आमंत्रित करने पर विचार कर रही है। सरकार की बीपीसीएल में 52.98 फीसदी हिस्सेदारी है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस योजना पर बातचीत अभी शुरुआती चरण में है।
शुरुआत में, सरकार की बीपीसीएल में अपनी पूरी हिस्सेदारी 8-10 अरब डॉलर में बेचने की योजना थी। चार साल पहले बनाई गई योजना के तहत 2020 में बिड्स मांगी गई थी। सरकार रूस की रोसनेफ्ट जैसी दिग्गज कंपनियों की इस सौदे में दिलचस्पी की उम्मीद कर रही थी।
हालांकि, रोसनेफ्ट और सऊदी अरामको (Saudi Aramco) ने बोली नहीं लगाई, क्योंकि उस समय तेल की कीमतें कम थीं और कमजोर मांग के चलते उन्होंने अपनी निवेश योजनाएं रोक रकी थीं।
नए प्लान में लगेगा 12 महीने से ज्यादा वक्त
हालांकि, सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इस वित्त वर्ष में BPCL की हिस्सेदारी बेचना मुश्किल है क्योंकि इस प्रोसेस में 12 महीने से ज्यादा का वक्त लगेगा। एक अधिकारी ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर अस्थिर नीतियों के चलते बिक्री की संभावनाओं को झटका लगा है।
अभी इस डील में हैं कई समस्याएं
अधिकारी ने कहा, “कई मुद्दे हैं, लेकिन सबसे हाल में नवंबर और फरवरी के बीच चार महीनों तक पेट्रोल की कीमतें नहीं बढ़ाई गई थीं। माना जाता है कि सरकार का चुनाव पर जोर था।”
भारत में मार्च के आसपास उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में चुनाव हुए थे और 22 मार्च से कीमतें बढ़नी शुरू हुईं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भाजपा ने पांच में से चार राज्यों में जीत दर्ज की थी।
दोनों अधिकारियों ने कहा कि सभी बिडर्स के पिछले महीने प्रोसेस से पीछे हटने के बाद यह बातचीत शुरू हुई है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट इक्विटी कंपनी अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट और वेदांता ग्रुप इस डील के लिए फाइनल बिडर थे।