Daily Voice: ग्लोबल मंदी का भारत की ग्रोथ पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर, अच्छे रिटर्न के लिए मध्यम से लंबी अवधि के लिए करें निवेश

ग्लोबल मंदी और महंगाई के दबाव से नियर टर्म में कंपनियों के ग्रोथ आउटलुक और मुनाफे पर नेगेटिव असर पड़ सकता है

अपडेटेड Aug 01, 2022 पर 7:34 PM
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रोशी जैन ने इस बातचीत में ये भी कहा कि व्यक्तिगत आय और उपभोग स्तर में लगातार बढ़ोतरी से भी इकोनॉमी को सपोर्ट मिलेगा

भारत की इकोनॉमी में ग्रोथ के लिए जिम्मेदार कारणों पर मध्यम अवधि में ग्लोबल मंदी का कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। भारत की मीडियम टर्म ग्रोथ संभावनाएं काफी मजबूत बनी हुई हैं। ये बातें HDFC असेट मैनेजमेंट की रोशी जैन ने मनीकंट्रोल से हुई बातचीत में कही हैं। जैन का कहना है कि सरकार की नीतियों, प्राइवेट सेक्टर की तरफ से बढ़ रहे निवेश, ग्लोबल सप्लाई चेन में हो रहे बदलाव, इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सरकार की तरफ से किए जा रहे खर्च और हाउसिंग साइकिल में उछाल कुछ ऐसे कारण हैं जिनके चलते भारत के लिए मध्य अवधि में ग्रोथ की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं।

रोशी जैन ने इस बातचीत में ये भी कहा कि व्यक्तिगत आय और उपभोग स्तर में लगातार बढ़ोतरी से भी इकोनॉमी को सपोर्ट मिलेगा। जैन की राय है कि मध्यम अवधि में भारत की इकोनॉमी के विभिन्न सेक्टरों में अच्छी ग्रोथ देखने को मिलेगी। खपत, उत्पादन, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेवा से जुड़े सेक्टर बेहतर प्रदर्शन करते नजर आएंगे। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान जियो पॉलिटिकल तनाव, सप्लाई चेन से जुड़ी दिक्कतों, रिकॉर्ड महंगाई और बढ़ती बॉन्ड यील्ड जैसी ग्लोबल इकोनॉमी की चुनौतियों का भारतीय इकोनॉमी ने काफी मजबूती से सामना किया है। भारत की इकोनॉमी इन मुश्किल परिस्थितियों में भी तुलनात्मक रूप से मजबूत बनी हुई है।

इस समय इक्विटी मार्केट में क्या हो रणनीति? इस सवाल का जवाब देते हुए जैन ने कहा कि इक्विटी मार्केट की बात करें तो इसको लेकर कुछ बातें हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए। सबसे पहली और सबसे अहम बात ये है कि इक्विटी बाजार में मध्यम से लंबी अवधि के नजरिए से ही निवेश करें। निवेश के लिए ऐसी कंपनियों का चुनाव करें। जो तुलनात्मक रूप से अच्छी स्थिति में हों। जिनका वैल्यूएशन अच्छा हो। इस तरह की कंपनियों में निवेश के बाद इसमें लंबे समय तक टिकें।


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इसके अलावा निवेश करते समय शॉर्ट टर्म टैक्टिकल कॉल की जगह स्टॉक्स के फंडामेंटल की जगह फोकस करें। बुनियादी रूप से मजबूत और अनुशासित असेट एलोकेशन के जरिए निवेशक वित्त बाजार के बीच-बीच आने वाले उतार-चढ़ाव से निपटते हुए लंबी अवधि में अच्छी कमाई कर सकता है।

इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि ग्लोबल मंदी और महंगाई के दबाव से नियर टर्म में कंपनियों के ग्रोथ आउटलुक और मुनाफे पर निगेटिव असर पड़ सकता है। इसके अलावा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के चलते पूंजी की उच्च लागत और लिक्विडिटी में कड़ाई आने के चलते कंपनियों के वैल्यूएशन पर असर पड़ सकता है। इस बात को हमें ध्यान में रखनी चाहिए।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

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