Daily Voice: RBI ब्याज दरों में नहीं करेगा बहुत ज्यादा बढ़ोतरी, पावर और कैपिटल गुड्स में निवेश के अच्छे मौके

कमोडिटी की कीमतों में हाल में आई गिरावट और मानसून की अच्छी चाल को देखते हुए अनुमान है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर आरबीआई का रुख दुनिया के दूसरे केद्रीय बैंकों की तुलना में नरम होगा

अपडेटेड Aug 01, 2022 पर 1:20 PM
सरकार ने ग्रीन एनर्जी के लिए काफी बड़े लक्ष्य तय कर रखे हैं। जिसकी वजह से भी पावर सेक्टर में निवेश के अच्छे मौके नजर आ रहे हैं

पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि बाजार ने किन खबरों और संभावनाओं को पचा लिया है। फिर भी Mirae Asset Mutual Fund के हर्षद बोरावाके (Harshad Borawake) का मानना है कि बाजार अब इस निष्कर्ष पर पहुंच गया है कि महंगाई अपने चरम पर पहुंच चुकी है।

मनीकंट्रोल से हुई बातचीत में हर्षद बोरावाके ने कहा कि खुदरा महंगाई रेट अभी भी आरबीआई के 2-6 फीसदी के टारगेट रेंज से ऊपर है। ऐसे में आरबीआई अपनी रेपो रेट में बढ़ोतरी जारी रख सकता है। लेकिन कमोडिटी की कीमतों में हाल में आई गिरावट और मानसून की अच्छी चाल को देखते हुए अनुमान है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर आरबीआई का रुख दुनिया के दूसरे केद्रीय बैंकों की तुलना में नरम होगा।

यूएस फेड के हाल के फैसले पर बात करते हुए हर्षद बोरावाके ने आगे कहा कि पिछली फेड मीटिंग में ब्याज दरों में की गई 75 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी उम्मीद के अनुरुप ही रही। इसके अलावा यूएस फेड के चेयरमैन Jerome Powell ने ग्रोथ में मंदी की बात स्वीकार की।


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उन्होंने यह भी कहा कि मॉनिटरी पॉलिसी जरुरत के हिसाब से पीछे चल रही है। जिसको देखते हुए अभी मौद्रिक नीतियों में और कड़ाई आ सकती है। उन्होंने आगे कहा कि कमोडिटी की कीमतों में हाल में गिरावट आई है। ऐसे में आगे महंगाई में कमी आ सकती है।

ग्लोबल इकोनॉमी में बात करते हुए उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन के युद्ध के चलते ग्लोबल सप्लाई चेन पर नकारात्मक असर पड़ा है। इसकी वजह से एनर्जी और फूड की कीमतों में बढ़त हुई है। जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ी है। यह स्थिति कब तक कायम रहेगी इसका हम सिर्फ अंदाजा लगा सकते हैं। लेकिन इतना पक्का है कि जब तक यह स्थिति रहेगी तब तक ग्लोबल ग्रोथ पर दबाव बना रहेगा।

कैपिटल गुड्स सेक्टर के संभावनाओं से जुड़े सवालों का जबाव देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों से सरकार लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कर रही है। लेकिन निजी क्षेत्र से आने वाले निवेश में हमें कोई खास बढ़ोतरी देखने को नहीं मिली। जैसे ही इकोनॉमी सामान्य स्थिति में लौटेगी और इंडस्ट्री यूटिलाइजेशन में सुधार होगा वैसे ही निजी निवेश बढ़ता दिखेगा। जिससे कैपिटल गुड्स सेक्टर को फायदा होगा। इसके अलावा पीएलआई जैसी सरकारी स्कीमों से भी इस सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा।

पावर सेक्टर में निवेश की संभावना से जुड़े सवाल का जबाव देते हुए उन्होंने कहा कि पावर सेक्टर कई सालों से डी-रेटिंग के दौर से गुजर रहा है। इसके अलावा ESG (इन्वायरनमेंटल, सोश , गर्वनेंस) से जुड़ी चिंताएं इस सेक्टर पर और दबाव बनाती रही हैं। लेकिन इकोनॉमिक रिकवरी के गति पकड़ने और ESG से जुड़ी चिंताओं के समाधान के शुरुआत के साथ ही आगे हमें पावर सेक्टर में निवेश आता नजर आएगा। इसके अलावा सरकार ने ग्रीन एनर्जी के लिए काफी बड़े लक्ष्य तय कर रखे हैं। जिसकी वजह से भी पावर सेक्टर में निवेश के अच्छे मौके नजर आ रहे हैं।

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