FPI ने मार्च में भारतीय बाजार से निकाले 41,000 करोड़ रुपये, जानिए क्यों 6 महीने से जारी है बिकवाली

एक्सपर्ट्स ने कहा, क्रूड की कीमतों में उछाल और महंगाई को देखते हुए निकट भविष्य में FPI के फ्लो में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है

अपडेटेड Apr 03, 2022 पर 12:20 PM
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विदेशी निवेशक पिछले छह महीने से इक्विटी मार्केट से पूंजी निकाल रहे हैं और अक्टूबर, 2021 से मार्च, 2022 के बीच 1.48 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं

FPI selling : विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में मार्च में लगातार छठे महीने बिकवाली जारी रही। इस महीने फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) ने यूएस फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) के ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद और यूक्रेन वार (Russia-Ukraine war) के चलते बिगड़ते जिओपॉलिटकल हालात को देखते हुए भारतीय इक्विटी मार्केट से 41,000 करोड़ रुपये निकाले।

6 महीने में निकाले 1.48 लाख करोड़ रुपये

एक्सपर्ट्स ने कहा, क्रूड की कीमतों में उछाल और महंगाई को देखते हुए निकट भविष्य में FPI के फ्लो में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। डिपॉजिटरीज से मिले डाटा के मुताबिक, FPI ने पिछले महीने इक्विटी मार्केट से 41,123 करोड़ रुपये की बिकवाली की।


वहीं, इससे पहले फरवरी में 35,592 करोड़ रुपये और जनवरी में 33,303 करोड़ रुपये निकाले थे। विदेशी निवेशक पिछले छह महीने से इक्विटी मार्केट से पूंजी निकाल रहे हैं और अक्टूबर, 2021 से मार्च, 2022 के बीच 1.48 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं।

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इन वजहों से बिकवाली कर रहे हैं विदेशी निवेशक

अपसाइडएआई के कोफाउंडर अतनु अग्रवाल ने कहा, ‘‘एफपीआई की बिकवाली की मुख्य वजह ब्याज दरों के लिहाज से माहौल में बदलाव और फेडरल रिजर्व द्वारा प्रोत्साहनों को समाप्त करने के संकेत हैं।’’

उन्होंने कहा कि कई और कारण भी हैं जिनकी वजह से FPI भारतीय बाजार से निकासी कर रहे हैं। इनमें भारतीय इक्विटीज की महंगी वैल्युएशन, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, रुपये की कमजोरी और रूस-यूक्रेन संघर्ष (Russia-Ukraine conflict) जैसे कारण शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यही वजह है वे निवेश के सुरक्षित विकल्पों की ओर जा रहे हैं। यदि फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी को टालने के संकेत मिलते हैं तो संभवत: हमें इतनी ज्यादा निकासी देखने को नहीं मिलती।’’

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तुलनात्मक रूप से महंगा है भारतीय बाजार

मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट डायरेक्ट- मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने इसी तरह के तर्क देते हुए कहा कि यूएस फेडरल रिजर्व का रुख, जिओपॉलिटिकल हालात को लेकर चिंता की वजह से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से निकासी कर रहे हैं।

ट्रू बेकन और जिरोधा के कोफाउंडर निखिल कामत (Nikhil Kamath) ने कहा कि तुलनात्मक रूप से भारतीय बाजार महंगा लगता है और भारत से पूंजी निकालकर FPI चीन और दूसरे बाजारों में निवेश कर रहे हैं।

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