FPI outflows : जहां तक एफपीआई आउटफ्लो की बात है तो रुपये में कमजोरी और अच्छी वैल्यूएशंस भारत के लिए अच्छा संकेत नहीं है। डाटा से पता चलता है फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स ने इस महीने में अभी तक 6,417 करोड़ रुपये निकाले हैं और 2022 में अभी तक 1,33,579 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। रुपये में कमजोरी से एफपीआई के इक्विटी रिटर्न में कमी आती है। वहीं अच्छी वैल्यूएशन होने के कारण भी मदद नहीं मिल रही है। जिओजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वी के विजयकुमार ने कहा, “गिरावट के बावजूद वित्त वर्ष 23 की संभावित अर्निंग्स की तुलना में निफ्टी50 (Nifty50) 19 गुने पर कारोबार कर रहा है। यह 16 गुने के दीर्घकालिक औसत से ज्यादा है। निश्चित रूप से यह खरीद लायक वैल्यूएशन नहीं है।”