सुमित मेहरोत्रा ने कहा कि मेटल कंपनियों पर भारी भरकम कर्ज है और कंपनियों ने कैपैक्स की भी घोषणा की है
मेटल शेयरों में बिकवाली का सिलसिला नहीं थम रहा है। निफ्टी मेटल इंडेक्स आज फिर 1.5 परसेंट नीचे कारोबार करता हुआ दिखाई दिया। मेटल की मजबूती पर ग्रहण लगा हुआ है। इस सेक्टर की कंपनियों के बेहतर नतीजों के बावजूद बिकवाली जारी है। दिग्गज स्टील कंपनियों के शेयरों 25% तक गिरे हैं। इस पूरे सेक्टर पर सीएनबीसी-आवाज़ के सुमित मेहरोत्रा ने स्कैनिंग की है।
जानते हैं क्यों मेटल सेक्टर कभी गरम है तो कभी नरम, इस पर सुमित मेहरोत्रा की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट-
सुमित मेहरोत्रा ने कहा कि मेटल सेक्टर के शेयर इस सिंगल डिजिट पीई पर नजर आ रहे हैं। इसमें कई शेयर 7, 8 या 3 के पीई के वैल्यूएशन में नजर आ रहे हैं। इसलिए लोगों को लग सकता है कि इतना सस्ता सेक्टर है तो इसमें पैसा लगाने में दिक्कत कहां है। लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि जब मेटल कंपनियां कैपेक्स करती है। तब इनका साइकल रिवर्स होकर तेजी की तरफ जाता है तो इनके नतीजे अच्छे आते हैं।
इनके नतीजे अच्छे आते हैं तो ईपीएस बढ़ता है जिसकी वजह से पीई भी अच्छी होती है लेकिन जैसे ही साइकल घूमता है तो ईपीएस कमजोर होते हैं और पीई भी नीचे गिरती है कभी-कभी तो इसमें लॉस भी नजर आता है।
सुमित ने विस्तार से बताते हुए इस बार मेटल कंपनियों के नतीजे अच्छे आये हैं। इसमें इनपुट लागत की थोड़ी दिक्कत रही लेकिन सबके रियलाइजेशन बेहतर रहे हैं। यहां तक कि स्टील, कॉपर, निकेल, एल्युमिनियम और आयरन के भी रियलाइजेशन अच्छे नजर आये हैं। नंबर अच्छे आने बावजूद कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली है।
इस लिहाज से मुख्य तौर पर चार कंपनियों टाटा स्टील, हिडाल्को, वेदांता और जेएसपीएल के शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इसमें से हिंडाल्को के शेयर में 33 प्रतिशत, वेदांता में 25 प्रतिशत, टाटा स्टील में 24 प्रतिशत और जेएसपीएल में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है।
मेटल कंपनियों पर भारी कर्ज
कंपनियों के शेयर भागे हैं और कुछ कंपनियों ने डिविडेंड की घोषणा की है। हालांकि कंपनियों पर भारी कर्ज भी है। पिछले वित्त वर्ष के आंकड़ों के अनुसार टाटा स्टील पर करीब 76000 करोड़ रुपये का कर्ज है, जेएसडब्ल्यू स्टील पर 71000 करोड़ रुपये, हिंडाल्को पर 68000 करोड़ रुपये, वेदांता पर 54000 करोड़ रुपये और जेएसपीएल पर करीब 17000 करोड़ रुपये का कर्ज है।
सुमित मेहरोत्रा ने आगे कहा कि मेटल कीमतों में तेजी के चलते कंपनियों ने क्षमता विस्तार भी किया है। इस समय टाटा स्टील की मौजूदा क्षमता 34 मिलियन टन है जिसमें कंपनी 7 मिलियन टन का विस्तार करना चाहती है। ये शेयर इस समय 5 के मल्टीपल पर मिल रहा है। वहीं जेएसडब्ल्यू स्टील की मौजूदा क्षमता 28 मिलियन टन है जिसमें कंपनी 8.5 मिलियन टम का विस्तार करना चाहती है। इस समय ये शेयर 7 के मल्टीपल पर मिल रहा है।
इसी तरह वहीं जेएसपीएल की मौजूदा क्षमता 20 मिलियन टन है जिसमें कंपनी 5 मिलियन टन का विस्तार करना चाहती है। इस समय ये शेयर 7.4 के मल्टीपल पर मिल रहा है।
दूसरी तरफ हिंडाल्कों का कैपेक्स 60000 करोड़ रुपये का है जो कि 6.5 के मल्टीपल पर मिल रहा है वहीं वेदांता का 3600 करोड़ रुपये का कैपेक्स है और ये 8.5 के मल्टीपल पर उपलब्ध है।
सुमित मेहरोत्रा ने इस रिपोर्ट को पेश करते हुए कहा कि मेटल की कमजोरी की एक वजह कंपनियों पर कर्ज का बोझ ज्यादा होना है। दूसरी तरफ कंपनियों द्वारा कैपेक्स की भी ऐलान किया गया है। कंपनियों ने ऊंची कीमतों की वजह से कैपेक्स का ऐलान किया है। वहीं कंपनियों ने अच्छे नंबर पेश किये हैं और अच्छे नंबर्स की वजह से पीई सस्ता दिखाई दे रहा है।
इसलिए कुल मिलाकर सुमित ने कहा कि निवेशकों को सोच-समझकर और संभल कर ही मेटल में कोई कॉल लेना चाहिए।
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।)