मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने सर्कुलर जारी कर प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल लोगों के साथ रेगुलेटेड इकाइयों के जुड़ाव से संबंधित प्रावधानों को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है।

मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने सर्कुलर जारी कर प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल लोगों के साथ रेगुलेटेड इकाइयों के जुड़ाव से संबंधित प्रावधानों को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है।
हम आपको इस बारे में यहां विस्तार से बता रहे हैं
हालिया सर्कुलर क्या है?
हाल में जारी सर्कुलर में विस्तार से बताया गया है कि स्टॉक एक्सचेंज और ब्रोकरेज फर्में जैसी रेगुलेटेड इकाइयों (REs) को दो प्रतिबंधित गतिविधियां में शामिल लोगों से नहीं जुड़ने को कहा गया है। इन दो प्रतिबंधित गतिविधियों में बिना सेबी की अनुमति या रजिस्ट्रेशन के बिना प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर निवेश सलाह देना और परफॉर्मेंस या रिटर्न का दावा करना है।
लेकिन क्या रेगुलेटर ने पहले इस जुड़ाव पर पाबंदी पर पाबंदी नहीं लगाई थी?
हां। ये रेगुलेशंस 29 अक्टूबर 2024 से प्रभावी हुए हैं। रेगुलेटेड इकाइयां (REs) और उनके एजेंट्स को 22 अक्टूबर 2024 को सर्कुलर के जरिये सलाह दी गई थी कि वे इन दो प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल लोगों के साथ मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट को खत्म कर लें। हालांकि, बाजार के खिलाड़ियों को कुछ प्वाइंट्स के बारे में स्पष्टता नहीं थी, मसलन जुड़ाव का क्या मतलब है, क्या इसमें क्लाइंट्स का रेफरेल भी शामल है।
हालिया सर्कुलर में तीन बिंदुओं पर चीजें साफ की गई हैं।
जुड़ाव का क्या मतलब है?
सर्कुलर के मुताबिक, 'जुड़ाव' तब माना जाएगा, जब
(a) ऐसा ट्रांजैक्शन जिसमें पैसा या इसके मूल्य का कुछ शामिल हो,
(b) किसी क्लाइंट का रेफरल,
(c) इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सिस्टम का जुड़ाव
(d) इसी तरह का कोई अन्य जुड़ाव
क्या ऐसे लोग बिना मौद्रिक फायदे के क्लाइंट रेफर कर सकते हैं?
नहीं। सर्कुलर के मुताबिक, ' क्लाइंट सूचना साझा करना भी क्लाइंट रेफर करने जैसा ही है। लिहाजा, किसी तरह का भुगतान करना, भुगतान पाना या किसी शख्स के साथ क्लाइंट सूचना साझा करना 'जुड़ाव' ही माना जाएगा और इसकी अनुमति नहीं है। लिहाजा, ऐसे लोगों से क्लाइंट सूचना भी हासिल करने की अनुमति नहीं है।
क्या रेगुलेटेड इकाइयां अपने ब्रांड्स को बढ़ावा देने के लिए ऐसे लोगों का इस्तेमाल कर सकती हैं?
नहीं। सर्कुलर के मुताबिक, रेगुलेटेड इकाइयां अपनी प्रमोशनल या मार्केटिंग गतिविधियों के लिए अन्य शख्स का इस्तेमाल कर सकती हैं, बशर्ते यह शख्स इन प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल नहीं हो। उदाहरण के तौर पर वे किसी ऐसे इनफ्लूएंसर के यूट्यूब चैनल पर विज्ञापन नहीं दे सकते, जो बिना रजिस्ट्रेशन के निवेश सलाह मुहैया कराता हो।
अगर ऐसा शख्स अन्य रेगुलेटेड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स को बढ़ावा दे रहा हो तो?
ऐसी स्थिति में भी नहीं। अगर यह शख्स किसी तरह की प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल है, तो सेबी के रेगुलेशन वाली इकाइयों का ऐसे किसी शख्स से जुड़ाव नहीं हो सकता। उदाहरण के तौर पर अगर ऐसा कोई शख्स ऐसे इंश्योरेंस प्रोडक्ट को बढ़ावा दे रहा हो, जो इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) के दायरे में आता है, तो उस शख्स को सेबी द्वारा रेगुलेटेड प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने की स्वतंत्रता होगी।
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