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ICICI Securities डीलिस्टिंग: कंपनी के कम वैल्यूएशन के कारण नॉर्वे के Norges Bank को ऐतराज

ICICI Securities Delist Process: आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज (ICICI Securities) ने जून के आखिरी में स्टॉक मार्केट से बाहर निकलने यानी डीलिस्टिंग का ऐलान किया था। इसके बाद यह आईसीआईसीआई बैंक के पूर्ण मालिकाना हक वाली कंपनी हो जाएगी। हालांकि अब डीलिस्टिंग प्रोसेस में एक अड़चन आ गई है और शेयरहोल्डर्स सवाल उठा रहे हैं। जानिए क्या है शेयरहोल्डर्स की दिक्कत

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Sep 07, 2023 पर 4:18 PM
ICICI Securities डीलिस्टिंग: कंपनी के कम वैल्यूएशन के कारण नॉर्वे के Norges Bank को ऐतराज
29 जून को आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने स्टॉक मार्केट से बाहर जाने का ऐलान किया था। कंपनी ने ऐलान किया था कि इसके बाद यह अपनी पैरेंट कंपनी आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) के पूर्ण मालिकाना हक वाली कंपनी हो जाएगी।

ICICI Securities Delist Process: आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज (ICICI Securities) की डीलिस्टिंग में एक बड़ी अड़चन आ गई है। नॉर्वे की सरकारी पेंशन फंड मैनेजर और एक भारतीय पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) इसके खिलाफ वोट कर सकते हैं। मनीकंट्रोल को सूत्रों के हवाले से जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक इनकी चिंता डीलिस्टिंग के लिए कम वैल्यूएशन है। कम वैल्यूएशन के चलते मुनाफा भी कम हो जाएगा। नॉर्वे के नॉर्गस बैंक इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट (Norges Bank) की गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल की इसमें 3.13 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके अलावा दक्षिण भारत की पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस की भी आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज में करीब 3 फीसदी हिस्सेदारी है। बता दें कि पीएमएस अपने क्लाइंट्स के खाते में शेयर सीधे भेज देता है लेकिन उसके पास इन्हें ऑपरेट करने और वोट करने का पॉवर ऑफ अटॉर्नी यानी पूरा अधिकार है।

ICICI Securities की डीलिस्ट योजना क्या है

29 जून को आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने स्टॉक मार्केट से बाहर जाने का ऐलान किया था। कंपनी ने ऐलान किया था कि इसके बाद यह अपनी पैरेंट कंपनी आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) के पूर्ण मालिकाना हक वाली कंपनी हो जाएगी। आईसीआईसीआई बैंक की इसमें 74.83 फीसदी हिस्सेदारी और बाकी शेयर पब्लिक के पास हैं। अब डीलिस्टिंग प्रोसेस के तहत ब्रोकिंग फर्म के पब्लिक शेयरहोल्डर्स को 100 शेयर के बदले में आईसीआईसीआई बैंक के 67 शेयर मिलेंगे। दोनों के बोर्ड से इसकी मंजूरी मिल चुकी है लेकिन शेयरहोल्डर्स, दोनों के क्रेडिटर्स, आरबीआई, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और स्टॉक एक्सचेंजों से अभी मंजूरी बाकी है।

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