IDBI Bank Ltd के शेयरों में 15 अक्टूबर को बिकवाली का दबाव है। दिन में शेयर की कीमत पिछले बंद भाव से लगभग 8 प्रतिशत तक गिरकर 83.33 रुपये के लो तक गई। कंपनी का मार्केट कैप घटकर 90500 करोड़ रुपये पर आ गया है। एक दिन पहले सरकार की ओर से घोषणा हुई कि कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स, बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी। सौदा करीब 53,000 करोड़ रुपये का होगा। यह किसी भारतीय बैंक में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश होगा। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने फेयरफैक्स की सब्सिडियरी कनाडा इंक को रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी है।
इस डेवलपमेंट के बाद गुरुवार को IDBI Bank के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। हालांकि बुधवार को सौदे की घोषणा से पहले बैंक के शेयरों में 9 प्रतिशत की तेजी आई थी। डील के तहत IDBI Bank में सरकार 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 26,620 करोड़ रुपये में और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 26,440 करोड़ रुपये में बेचेंगे। सौदा चालू वित्त वर्ष 2026-27 में पूरा होने की संभावना है। इसके पूरा होने के बाद केंद्र सरकार IDBI Bank के बोर्ड से बाहर हो जाएगी।
बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स के नेतृत्व वाली फेयरफैक्स प्रति शेयर 81 रुपये का भुगतान करेगी। यह रकम दो स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों द्वारा तय की गई 75.99 रुपये की फेयर वैल्यू से अधिक है। लेन-देन के लिए अभी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी की ज़रूरत है, जो "फिट एंड प्रॉपर" (उपयुक्तता) का आकलन करेगा। इसके अलावा, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) और अन्य वैधानिक प्राधिकरणों की मंजूरी भी जरूरी होगी।
IDBI Bank में अभी LIC के पास 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी
वर्तमान में IDBI Bank में पब्लिक शेयरहोल्डिंग केवल 5.29 प्रतिशत है। सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है और इसका बैंक पर नियंत्रण है। वहीं, भारत सरकार की हिस्सेदारी 45.48 प्रतिशत है। बैंक का शेयर 6 महीनों में 13 प्रतिशत चढ़ा है।
इस साल मार्च महीने की शुरुआत में IDBI Bank में हिस्सेदारी बिक्री को रद्द कर दिया गया था। इसकी वजह यह रही कि कथित तौर पर दो संभावित खरीदारों की वित्तीय बोलियां, रिजर्व प्राइस से कम थीं। ये संभावित खरीदार एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स थे।
लंबे वक्त से अटका है प्राइवेटाइजेशन
IDBI Bank में सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री की प्रक्रिया लंबे वक्त से अटकी हुई है। सरकार ने सबसे पहले साल 2016 में घोषणा की थी कि वह IDBI Bank का प्राइवेटाइजेशन करना चाहती है। यह विचार सबसे पहले फरवरी 2016 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केंद्रीय बजट भाषण में आधिकारिक तौर पर दिया था। बैंक में सरकारी हिस्सेदारी कम करने की पहली कोशिश मूल्यांकन संबंधी चिंताओं के कारण नाकाम हो गई थी।
हालांकि, सरकार ने बाद में कंट्रोलिंग स्टेक LIC को बेच दिया। जनवरी 2019 में LIC ने IDBI Bank को भारी खराब ऋणों (bad loans) से बचाने के लिए लगभग 21,624 करोड़ रुपये में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ली। इसके बाद बैंक प्राइवेट सेक्टर का बैंक बन गया। दिसंबर 2020 में बैंक में LIC की हिस्सेदारी घटकर 49.24 प्रतिशत हो गई।
इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी 2020 में वित्त वर्ष 2021 का बजट पेश करते हुए बैंक में सरकारी हिस्सेदारी और कम करने का प्रपोजल रखा। IDBI Bank के प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया को औपचारिक गति तब मिली, जब आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने मई 2021 में बैंक में मैनेजमेंट कंट्रोल के ट्रांसफर के साथ-साथ रणनीतिक विनिवेश के लिए अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दी। सरकार ने अक्टूबर, 2022 में LIC के साथ मिलकर इस बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (EoI) आमंत्रित किए। अक्टूबर 2022 में ही KPMG India को लेनदेन सलाहकार (Transaction Advisor) नियुक्त किया गया। फरवरी 2026 में एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स से वित्तीय बोलियां मिलीं।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।