इंडिया क्या फिर से दुनिया में टेक्सटाइल्स का सबसे बड़ा हब बनने जा रहा है?

एक समय दुनिया के टेक्सटाइल्स बाजार में इंडिया की धाक होती थी। लेकिन, धीरे-धीरे इंडिया की स्थिति कमजोर होती गई। पिछले कुछ सालों से एक्सपोर्ट के मामल में इंडिया को बांग्लादेश से कड़ी टक्कर मिल रही है। बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के बाद इंडिया के लिए फिर से नंबर वन बनने का मौका है

अपडेटेड Aug 30, 2024 पर 3:32 PM
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इंडिया की टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री 150 अरब डॉलर की है। इसका एक्सपोर्ट करीब 40 अरब डॉलर का है।

दुनिया के टेक्सटाइल्स बाजार में कभी इंडिया की धाक थी। बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता के बाद फिर से टेक्सटाइल्स के ग्लोबल मार्केट में इंडिया के सबसे ताकतवर बनने को लेकर चर्चा बढ़ गई है। सवाल है कि क्या इंडिया इस मार्केट में फिर से अपनी लीडरशिप पॉजिशन हासिल कर सकेगा? इंडिया के लिए बड़ी संभावनाएं दिख रही हैं, लेकिन इसके लिए इसे कई चुनौतियों से पार पाना होगा।

ग्लोबल मार्केट में इंडिया और बांग्लादेश की बादशाहत

दुनिया के टेक्सटाइल्स बाजार (Global Textiles Market) में इंडिया और बांग्लादेश जैसे कुछ देशों की बादशाहत रही है। इंडिया की टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री (Indian Textiles Industry) 150 अरब डॉलर की है। इसका एक्सपोर्ट करीब 40 अरब डॉलर का है। उधर, बांग्लादेश की टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री का आकार काफी छोटा है, लेकिन उसका एक्सपोर्ट 45 अरब डॉलर का है। इसमें रेडीमेड गारमेंट सेक्टर की ज्यादा हिस्सेदारी है। इंडिया का रेडीमेड गारमेंट एक्सपोर्ट बांग्लादेश के मुकाबले एक तिहाई है। यह 2015 से स्थिर है।


कपास की यील्ड चीन के मुकाबले काफी कम

दुनिया में टेक्सटाइल्स मार्केट में इंडिया की लीडरशिप पॉजिशन के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा कपास की यील्ड है। इंडिया और चीन कपास के दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक है। इंडिया और चीन दोनों का कपास का सालाना उत्पादन 60-60 लाख टन है। लेकिन, इंडिया में जहां इस उत्पादन के लिए 1.3 करोड़ हेक्टेयर का इस्तेमाल होता है वही चीन में सिर्फ 32 लाख हेक्टेयर में यह उत्पादन होता है।

एमएसपी की वजह से बढ़ जाती है कपास की कॉस्ट

इंडिया में कॉटन की औसत यील्ड सिर्फ 460 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। यह 780 किलोग्राम के ग्लोबल औसत से काफी कम है। चीन के शिनजियांग इलाके में यील्ड बढ़कर 2,000 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पहुंच गई है। ब्राजील में यह 1,800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। इंडिया में सरकार किसानों के हित में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का ऐलान करती है। FY24 में इसे 9 फीसदी और FY25 में 7.3 फीसदी बढ़ाया गया है। एमएसपी से किसानों को थोड़ी मदद मिलती है। लेकिन, एमएसपी बढ़ने से कपास की लागत बढ़ जाती है। जब दुनिया के दूसरे बाजारों में कपास की कीमत गिर रही हो तो यह और भी मुश्किल हो जाता है।

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कपास की कीमतें 30 फीसदी घटी है

पिछले छह महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की कीमत 30 फीसदी घटी है। इंडिया में सरकार किसानों को नुकसान से बचाने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी लगाती है, जिससे टैक्सटाइल्स कंपनियों के लिए कच्चे माल की कीमत बढ़ जाती है। इससे ग्लोबल मार्केट में इंडिया का प्रोडक्ट्स महंगा हो जाता है। ऐसे में अगर इंडिया को फिर से ग्लोबल टेक्सटाइल्स मार्केट का सबसे बड़ा हब बनना है तो सबसे पहले कपास की यील्ड बढ़ानी होगी। इसके लिए इनोवेशन, सरकार की मदद और रणनीति जरूरी है।

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