भारतीय शेयर बाजार को लगा सबसे बड़ा शॉक! दुनिया की 'टॉप 100' कंपनियों में एक भी इंडियन नहीं, एचडीएफसी बैंक-TCS की रैंकिंग में भारी गिरावट

India Out of Global Top 100 Companies List: साल 2025 की शुरुआत तक इस ग्लोबल लिस्ट में भारत का दबदबा था और रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL), एचडीएफसी बैंक और टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियां टॉप 100 में थीं। लेकिन आज लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बाजार की कमजोरी ने भारत से यह तमगा छीन लिया है

अपडेटेड May 19, 2026 पर 11:01 AM
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देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी TCS की रैंकिंग में सबसे बड़ी गिरावट आई है

Market Crash Impact: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से भारी बिकवाली का दौर जारी है। इसने देश को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। घरेलू इक्विटी मार्केट में आई इस भारी गिरावट के कारण इतिहास में पहली बार मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से अब दुनिया की टॉप 100 कंपनियों की लिस्ट में एक भी भारतीय कंपनी शामिल नहीं है।

साल 2025 की शुरुआत तक इस ग्लोबल लिस्ट में भारत का दबदबा था और रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL), एचडीएफसी बैंक और टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियां टॉप 100 में थीं। लेकिन आज लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बाजार की कमजोरी ने भारत से यह तमगा छीन लिया है।

रिलायंस से लेकर TCS तक, ग्लोबल रैंकिंग में आई भारी गिरावट


दुनिया के नक्शे पर भारतीय दिग्गजों की रैंकिंग कितनी बेरहमी से गिरी है, इसे आप इन आंकड़ों से समझ सकते हैं:

रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL): देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस, जो साल 2025 की शुरुआत में 57वें और 2026 की शुरुआत में 73वें नंबर पर थी, अब फिसलकर 106वें स्थान पर आ गई है।

एचडीएफसी बैंक: भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट ऋणदाता बैंक साल 2025 की शुरुआत में 97वें स्थान पर था, जो अब लुढ़ककर 190वें नंबर पर पहुंच गया है।

भारती एयरटेल: देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी भी साल 2026 की शुरुआत में 164वें स्थान पर थी, जो अब गिरकर 202वें स्थान पर आ गई है।

बैंकिंग सेक्टर्स का हाल: आईसीआईसीआई बैंक फिसलकर 274वें और देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक एसबीआई (SBI) गिरकर 276वें स्थान पर पहुंच गया है।

आईटी शेयरों में सबसे बड़ी तबाही

सबसे बुरी मार भारत के टॉप टेक्नोलॉजी स्टॉक्स पर पड़ी है:

TCS: देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी टीसीएस की रैंकिंग में सबसे दर्दनाक गिरावट आई है। साल 2025 की शुरुआत में 84वें और 2026 की शुरुआत में 171वें नंबर पर रहने वाली यह कंपनी अब सीधे 314वें स्थान पर जा गिरी है।

इन्फोसिस: देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी अब 198वें से गिरकर 590वें स्थान पर आ गई है। इसके अलावा आईटीसी (ITC) भी 296वें से फिसलकर सीधे 702वें नंबर पर पहुंच गया है।

$100 बिलियन क्लब से बाहर हुए कई दिग्गज, टॉप 500 में भी घटी संख्या

बाजार की इस कमजोरी ने भारत के '100 अरब डॉलर क्लब' को भी छोटा कर दिया है। इस साल की शुरुआत में भारत की करीब 6 कंपनियां इस क्लब में थीं, लेकिन अब केवल 3 कंपनियां ही इस जादुई आंकड़े के ऊपर बची हैं:

रिलायंस इंडस्ट्रीज: मार्केट कैप लगभग $198 बिलियन

एचडीएफसी बैंक: मार्केट कैप लगभग $124 बिलियन

भारती एयरटेल: मार्केट कैप लगभग $113 बिलियन

इस गिरावट के कारण आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और टीसीएस ने अपना $100 बिलियन का स्टेटस खो दिया है। वहीं, दुनिया की टॉप 500 कंपनियों की लिस्ट में भारत की संख्या साल 2025 की शुरुआत में 15 थी, जो 2026 की शुरुआत में 13 हुई और अब घटकर महज 9 कंपनियां रह गई है।

क्यों डूब रहा है भारतीय बाजार? ये हैं 4 मुख्य कारण

भारतीय बाजारों में गिरावट का यह सिलसिला मध्य-2024 से ही शुरू हो गया था, लेकिन हालिया दिनों में कुछ वैश्विक संकटों ने इसे और गंभीर बना दिया है:

मिडिल ईस्ट संकट: अमेरिका-ईरान-इजरायल के बीच जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, जिससे देश में महंगाई बढ़ने और राजकोषीय घाटा बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है।

ग्लोबल ब्रोकरेज हाउसेज के डाउनग्रेड की बाढ़: दुनिया की बड़ी-बड़ी रेटिंग और ब्रोकरेज एजेंसियों ने भारतीय बाजार को लेकर अपना आउटलुक घटा दिया है। मार्च में यूबीएस, मॉर्गन स्टेनली और नोमुरा ने, अप्रैल में जेपी मॉर्गन, एचएसबीसी और गोल्डमैन सैक्स ने और मई के पहले हफ्ते में सिटी ने भारत के मार्केट आउटलुक को डाउनग्रेड कर दिया है।

बढ़ता अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: अमेरिका में 10 साल का बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.6% और 30 साल का बॉन्ड यील्ड 5.159% पर पहुंच गया है। जब अमेरिका में बिना जोखिम के इतना शानदार रिटर्न मिल रहा हो, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर वापस अमेरिका ले जा रहे हैं।

AI और टेक बूम की कमी: भारतीय बाजार का वैल्यूएशन बहुत महंगा हो चुका है, जबकि भारतीय कंपनियों का मुनाफा लगातार घटता जा है। साथ ही अमेरिकी बाजार की तरह भारत में हाई-ग्रोथ टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर्स का वैसा एक्सपोजर नहीं है, जो वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर सके।

ग्लोबल मार्केट पर अमेरिकी 'टेक दिग्गजों' का राज

जहां भारतीय कंपनियां अपनी रैंकिंग गंवा रही हैं, वहीं अमेरिकी टेक कंपनियां दुनिया पर राज कर रही हैं। AI की बदौलत एनवीडिया (Nvidia) $5.33 ट्रिलियन के मार्केट कैप के साथ दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है। इसके बाद अल्फाबेट (गूगल) $4.7 ट्रिलियन के साथ दूसरे, Apple $4.3 ट्रिलियन के साथ तीसरे स्थान पर है। माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन दुनिया की टॉप 5 कंपनियों में शामिल हैं।

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