भारत इस समय ग्लोबल अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, लेकिन निवेशकों के लिए यह घबराने का नहीं बल्कि सोच-समझकर एंट्री लेने का समय हो सकता है। इससे उन्हें मुनाफा कमाने का मौका मिल सकता है। क्वांट म्यूचुअल फंड ने अपने लेटेस्ट में यह बात कही है।
भारत इस समय ग्लोबल अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, लेकिन निवेशकों के लिए यह घबराने का नहीं बल्कि सोच-समझकर एंट्री लेने का समय हो सकता है। इससे उन्हें मुनाफा कमाने का मौका मिल सकता है। क्वांट म्यूचुअल फंड ने अपने लेटेस्ट में यह बात कही है।
वोलैटिलिटी बढ़ी, लेकिन स्ट्रैटेजी बदली
दुनिया भर के बाजारों में उतार-चढ़ाव तेज हुआ है। S&P 500 और Nifty 50 जैसे इंडेक्स दबाव में हैं। बॉन्ड यील्ड बढ़ रही हैं और कमोडिटी कीमतों में भी अस्थिरता है। VIX इंडेक्स में उछाल दिखा रहा है कि बाजार में डर और अनिश्चितता बढ़ी है।
लेकिन क्वांट फंड हाउस इसे किसी बड़ी समस्या की शुरुआत नहीं मानता। उसका कहना है कि यह एक तरह का एडजस्टमेंट फेज है, जहां पहले की ज्यादा बढ़ी वैल्यूएशन अब ठीक हो रही हैं। यह डर का माहौल है, ऐसे में अक्सर बेहतर खरीद के मौके बनते हैं।
कैपिटुलेशन के संकेत क्यों अहम
रिपोर्ट में एक अहम संकेत ‘कैपिटुलेशन’ का भी बताया गया है। यह वह स्थिति होती है जब लगातार गिरावट के बाद निवेशक घबराकर तेजी से अपने शेयर बेचने लगते हैं।
इतिहास बताता है कि ऐसा दौर अक्सर गिरावट के आखिरी चरण में आता है। इसके बाद बाजार या तो स्थिर होता है या धीरे-धीरे रिकवरी शुरू होती है। यानी भले ही अभी उतार-चढ़ाव बना रहे, लेकिन निवेश की सोच अब बदल सकती है। पूरी तरह बचने के बजाय चुनिंदा निवेश करने का समय हो सकता है।
भारत क्यों बना है मजबूत विकल्प
वैश्विक बाजारों में दबाव के बावजूद भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत दिख रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की नॉमिनल GDP ग्रोथ चीन से लगभग दोगुनी रफ्तार से बढ़ रही है। यही वजह है कि भारत निवेशकों के लिए एक पसंदीदा बाजार बना हुआ है।
मजबूत मैक्रो संकेत, लगातार सुधार और कंपनियों की कमाई में सुधार की उम्मीद यह दिखाती है कि बाजार से बाहर निकलने की बजाय निवेश बनाए रखना ज्यादा समझदारी हो सकती है।
फंड हाउस की रणनीति क्या कहती है
क्वांट म्यूचुअल फंड ने अपने पोर्टफोलियो में कैश घटाया है और इक्विटी में निवेश बढ़ाया है। इसका मतलब है कि उन्हें मौजूदा वैल्यूएशन पर भरोसा है।
उनकी रणनीति में लार्ज कैप शेयरों को बेस बनाया गया है, जबकि मिड और स्मॉल कैप में चुनिंदा निवेश के जरिए बेहतर रिटर्न यानी अल्फा हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
किन सेक्टरों पर दांव
फंड हाउस की नजर कुछ खास सेक्टरों पर बनी हुई है। इसमें फाइनेंशियल सेक्टर जैसे NBFC, प्राइवेट बैंक, इंश्योरेंस और AMC शामिल हैं। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी, कंजम्प्शन थीम जैसे FMCG और फूड, साथ ही फार्मा, टेलीकॉम और होटल सेक्टर भी फोकस में हैं।
वहीं, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर फिलहाल अंडरवेट रुख रखा गया है, क्योंकि इनपुट कॉस्ट और सप्लाई चेन को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।
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