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अगले 2 महीने में कहां जाएगा शेयर बाजार? इस दिग्गज ब्रोकरेज फर्म ने दे दी बड़ी चेतावनी

Stock Market: शेयर बाजार पिछले काफी समय से चलने का नाम ही नहीं ले रहा। हालिया गिरावट ने निवेशकों की दिल की धड़कनें बढ़ा दी है। हर कोई यही सोच रहा है – क्या यह गिरावट बस एक छोटा सा झटका है या फिर किसी बड़ी मंदी की शुरुआत? आने वाले दो महीनों में शेयर बाजार की चाल कैसी रहेगी? क्या निवेशकों को राहत मिलेगी, या गिरावट का यह दौर जारी रहेगा?

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Feb 17, 2025 पर 8:41 PM
अगले 2 महीने में कहां जाएगा शेयर बाजार? इस दिग्गज ब्रोकरेज फर्म ने दे दी बड़ी चेतावनी
Stock Markets: कोटक ने कहा कि छोटे और मझोले शेयरों अभी आगे भी अधिक दर्द का सामना करना पड़ सकता है

Stock Market: शेयर बाजार पिछले काफी समय से चलने का नाम ही नहीं ले रहा। हालिया गिरावट ने निवेशकों की दिल की धड़कनें बढ़ा दी है। हर कोई यही सोच रहा है – क्या यह गिरावट बस एक छोटा सा झटका है या फिर किसी बड़ी मंदी की शुरुआत? आने वाले दो महीनों में शेयर बाजार की चाल कैसी रहेगी? क्या निवेशकों को राहत मिलेगी, या गिरावट का यह दौर जारी रहेगा? आइए जानते हैं इस रिपोर्ट में

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने शेयर बाजार को लेकर एक रिपोर्ट निकाली है। ब्रोकरेज ने कहा कि शेयर बाजार में हाल में ही काफी तेज गिरावट देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद बाजार को लेकर सतर्क बने हुआ है। कोटक ने कहा कि बाजार पिछले कुछ सालों में आई तेजी को नए सिरे से एडजस्ट कर रहा है और इसके चलते शेयर बाजार की चाल अगले कुछ महीनों तक दिशाहीन बनी रह सकती है।

कोटक ने कहा कि अगर आप पिछले एक साल का रिटर्न देखें तो यह अभी भी लगभग फ्लैट है। इसका मतलब यह है कि इस गिरावट के बावजूद, शेयर बाजार में वैल्यू बाइिंग यानी निचले स्तर पर खरीदारी का कोई आकर्षक मौका नजर नहीं आ रहा है। कोटक ने कहा कि उसे आगे भी इस ट्रेंड के जारी रहने का अनुमान है।

कोटक ने कहा कि करीब 4 कारणों से शेयर बाजार में इस समय दबाव बना हुआ है। पहला है ऊंचा वैल्यूएशन- कई सेक्टर्स और स्टॉक्स अभी भी महंगे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं। दूसरा है कमजोर अर्निंग्स ग्रोथ- भारतीय कंपनियों की अर्निंग्स पिछले कुछ तिमाहियों से कमजोर बनी हुई हैं और आगे भी इनके कमजोर रहने की संभावना बनी हुई हैं। तीसरा है ऊंची ब्याज दरें- भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ब्याज दरें ऊंची बनी हुई हैं, इसके चलते निवेशकों का सेंटीमेंट प्रभावित हुआ है। और चौथा है विदेशी निवेशकों की भारत जैसे इमर्जिंग बाजारों में घटती दिलस्चपी, जिसके चलते वे लगातार बिकवाली कर रहे हैं।

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